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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Good news: After valley and Kishtwar, now saffron will grow in Rajori, first cultivation successful

खुशखबरी: घाटी और किश्तवाड़ के बाद अब राजोरी में भी उगेगी केसर, पहली खेती सफल

Tue, 04 Jan 2022 12:29 PM IST
करिश्मा चिब अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Tue, 04 Jan 2022 12:29 PM IST
सार

किश्तवाड़ और घाटी के बाद अब जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले में भी केसर की खेती करने में किसान  को सफलता मिली है। इससे क्षेत्र के सभी किसानों के चहरे खुशी से खिल उठे हैं। 

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Good news: After valley and Kishtwar, now saffron will grow in Rajori, first cultivation successful
केसर की फसल

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले में किसान विशाल चंद्र शर्मा ने अपने खेतों में केसर की खेती सफलतापूर्वक की। उनके खेतों में बैंगनी-नारंगी फूल खिलते देख लोग आश्चर्यचकित रह गए। जम्मू के किश्तवाड़ क्षेत्र में केसर की खेती से प्रभावित होकर, राजोरी प्रशासन ने भी जिले में केसर की खेती का विचार किया। बता दें कि कश्मीर घाटी के पंपोर इलाके के अलावा घाटी के बाहर केवल किश्तवाड़ जिले में ही केसर की खेती की जाती है।

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किसान विशाल चंद्र शर्मा ने कहा कि यह एक सपना है जो सच हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि राजोरी में केसर की खेती की जा सकती है। लेकिन हम जम्मू-कश्मीर के नए क्षेत्रों में केसर की खेती करने में सफल हुए।  उन्होंने केसर की खेती के लिए उनको प्रेरित करने के लिए राजोरी के जिला प्रशासन और कृषि विभाग का बहुत आभार व्यक्त किया।

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कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विशाल चंद्र शर्मा पहले जीवन की जरुरतों को पूरा करने के लिए गेहूं और मक्का की खेती कर रहे थे, लेकिन अब वह अधिक आय अर्जित करने और अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए अपने खेतों में केसर की फसल उगाने के इच्छुक हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि विशाल चंद्र को 15 मरले में लिए केसर की खेती करने के लिए राजी किया जिसके लिए केसर का बीज पंपोर कश्मीर से कृषि विभाग द्वारा खरीदा गया। बीज के अलावा, कुछ अन्य सहायता जैसे उर्वरक, श्रम शुल्क, खरपतवारनाशी आदि भी उन्हें प्रदान किए गए। केसर उगाने का कोई पूर्व अनुभव नहीं होने के कारण, किश्तवाड़ के विशेषज्ञों की मदद ली गई जिन्होंने केसर की खेती में शर्मा की सहायता की।


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उन्होंने बताया कि बीज की बुवाई 24 अगस्त 2021 को की गई थी। 12 दिसंबर 2021 को फुल खिलना शुरू हुआ। खिलने की प्रक्रिया 15 दिनों तक जारी रही, जिसके परिणामस्वरूप कुल 734 फूल और औसतन 45-50 फूल प्रति दिन थे। जिसके बाद फूलों की तुड़ाई की गई।

उन्होंने कहा कि आसपास के क्षेत्र के किसान भी मोहित हैं और उन्होंने आगामी सीजन में केसर की खेती करने की इच्छा व्यक्त की है। अधिकारियों ने कहा कि अब कृषि विभाग और किसान के लिए भविष्य की खेती के लिए बीज का संरक्षण चुनौती है। अधिकारियों ने कहा कि केसर की खेती का परीक्षण इस दिशा में सिर्फ एक और कदम है और निकट भविष्य में किसान समुदाय के कल्याण के लिए और भी बहुत कुछ आने वाला है।

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