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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Efforts to bring back the glorious past of 'Dogra' dynasty in Jammu and Kashmir, sound and light program will organise in bagh e bahu

जम्मू-कश्मीर में 'डोगरा' शासकों का गौरवशाली अतीत वापस लाने की कोशिश, बड़े बदलावों की गवाह बनेगी ये मुहिम

Fri, 28 Aug 2020 05:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, जम्मू से लौटकर
जितेंद्र भारद्वाज, जम्मू से लौटकर Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 28 Aug 2020 05:31 PM IST
सार

बाग-ए-बाहु गार्डन में म्युजिक एंड साउंड सिस्टम लगाया जा रहा है। जहां रोज चार शो आयोजित होंगे, जिनमें डोगरा शासकों की वीरता का बखान किया जाएगा। साथ ही जम्मू संभाग की मानसर लेक पर भी डोगरा संस्कृति और उनके गौरव को दर्शाने के लिए योजना बनाई गई है...

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Efforts to bring back the glorious past of 'Dogra' dynasty in Jammu and Kashmir, sound and light program will organise in bagh e bahu
बाग-ए-बाहू - फोटो : AmarUjala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद विकास का जो नया खाका खींचा जा रहा है, उसमें 'डोगरा' शासकों का गौरवशाली अतीत वापस लौटाने का मुद्दा भी शामिल है। मौजूदा जम्मू-कश्मीर प्रशासन इस दिशा में जुटा है। जम्मू संभाग के आसपास लोग यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि अब डोगरा शासकों की इस जमीन पर न्याय होगा। सभी को नौकरी मिलेगी, विकास में एक चौथाई नहीं, बल्कि आधा हिस्सा रहेगा।
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रियासी जिले के कडमाल क्षेत्र में रहने वाले संतोष कुमार और राजकुमार बड़ी उम्मीद के साथ कहते हैं, अब तो विकास होना ही चाहिए। पहले क्या था, सारा पैसा कश्मीर में लग रहा था। कौन पूछता था जम्मू को। डोगरा शासकों का गौरवशाली अतीत किसने जानबूझकर खत्म करने का प्रयास किया, सब लोग जानते हैं। आज स्थिति बदल रही है। डोगरा शासकों की धरती पर रहने वाली युवा पीढ़ी अब उन्हें जानेगी, उनका इतिहास पढ़ेगी।

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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मुबारक मंडी पैलेस, जो डोगरा शासकों की वीरता की कहानी कह रहा है, उसकी कायापलट का कार्य शुरू कर दिया है। बाग-ए-बाहु गार्डन में म्युजिक एंड साउंड सिस्टम लगाया जा रहा है। जहां रोज चार शो आयोजित होंगे, जिनमें डोगरा शासकों की वीरता का बखान किया जाएगा। साथ ही जम्मू संभाग की मानसर लेक पर भी डोगरा संस्कृति और उनके गौरव को दर्शाने के लिए योजना बनाई गई है। ये संस्कृति ऐसी है जिसमें राजपूत डोगरा, ब्राह्मण डोगरा, गुर्जर, बक्करवाल और जोगी आदि समुदाय शामिल हैं।

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राजकुमार बताते हैं कि अब विकास के लिए बराबर पैसा मिलने लगा है। शिक्षा का स्तर पर उठ रहा है। डोमिसाइल को लेकर एक असमंजस बना रहा था। लोगों को चक्कर काटने पड़े। ऑनलाइन प्रक्रिया में भी दिक्कतें आईं। जिनके पास 2004 से पहले के दूसरे दस्तावेज हैं, उन्हें डोमिसाइल बनवाने से छूट दी जा सकती थी। हालांकि अब प्रशासन, लोगों के घर पहुंच कर डोमिसाइल बना रहा है। यह अच्छी बात है।

राजनीतिक फायदा मिलने के सवाल पर राजकुमार कहते हैं, निश्चित तौर पर भाजपा इसका लाभ लेगी। इतने दशकों से कहां सुनवाई हो रही थी, अब प्रशासन ने सीधे मुंह बात करनी शुरू की है। उनके साथ मौजूद संतोष कुमार कहते हैं, डोगरा शासकों के गौरवशाली इतिहास को जानबूझकर खत्म करने का प्रयास किया गया। जम्मू संभाग ही नहीं, कश्मीर के लोग भी डोगरा शासकों की बहादुरी और संस्कृति के गवाह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इस संस्कृति को दबाने का प्रयास हुआ।

महाराजा हरि सिंह के योगदान को जिस तरह से पेश करने की जरूरत थी, वैसा कुछ नहीं किया गया। डोगरा शासकों की वीरता को इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी। जम्मू कश्मीर की सीमाओं की रक्षा करने में डोगरा शासकों का अहम योगदान रहा है।

ग्रामीणों का कहना था कि पहले तो यहां बहुत खराब स्थिति रही है। 'रोशनी' एक्ट को बड़ी साजिश के तहत लाया गया था। जम्मू संभाग से बाहर के लोगों को यहां बसाने के लिए यह नियम लागू कर दिया गया। इसके तहत लोगों को राजस्व महकमे के सामने ऐसे दस्तावेज पेश करने होते थे कि वे यहां पर इतने समय से रह रहे हैं। इसके बाद महकमा उनसे बहुत मामूली सी राशि लेकर उन्हें वह जमीन अलॉट कर देता था, जिस जगह पर वे रह रहे थे।

जम्मू निवासी मुकेश कुमार के मुताबिक यहां के लोगों की सुनवाई ही नहीं होती थी। जिस भी कार्यालय में जाओ, वहां कश्मीर के लोग बैठे रहते हैं। वे काम में अनावश्यक देरी करते हैं। आज जम्मू में चार टोल हैं, जबकि कश्मीर में एक है। आप देखिये, जब दरबार मूव होता है तो जम्मू के लोगों को कश्मीर में किराए पर जगह नहीं मिलती, लेकिन कश्मीर के लोग जब जम्मू में आते हैं तो उन्हें आदर के साथ किसी भी कालोनी में जगह मिल जाती है।
 

सीनियर मीडिया कर्मी प्रवीण शर्मा बताते हैं, यहां के लोगों का मानना है कि मोदी ने चुनाव के समय वादा किया था कि वे अनुच्छेद 370 हटाएंगे। वह वादा पूरा हो गया है। अब जम्मू संभाग के लोगों के दिमाग में नौकरी और जमीन का मुद्दा है। अब धीरे धीरे उस तरफ बढ़ रहे हैं। यहां आईआईआईएम जैसे संस्थान आ गए हैं। बड़ी इंडस्ट्री आ जाएं तो लोगों की नौकरी की चिंता दूर हो सकती है।

कश्मीर की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है, मगर डोगरा संस्कृति को वहां तक नहीं पहुंचने दिया गया। जो भी सरकार आती, उसने कश्मीर की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। लोग चाहते हैं कि जैसे कश्मीर की संस्कृति बढ़ी है, वैसे ही डोगरा संस्कृति को आगे लाया जाए।

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