जानिए, क्यों बार-बार उत्तर भारत में आ रहे हैं भूकंप
- भूगर्भीय हलचलें बढ़ा रहीं भूस्खलन
- संक्रमण काल से गुजर रहा हिमालयी क्षेत्र, बन-बिगड़ रहे नए भूस्खलन जोन
- पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ने से भूस्खलन जोन की स्थितियों में भी बदलाव
- सियाचिन और कारगिल के पहाड़ों में भूगर्भीय हलचलों से हिमस्खलन
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लगातार चल रहीं भूगर्भीय हलचलें भविष्य में बड़े खतरे का संकेत हैं। इंडियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट में धंसने की प्रक्रिया से पूरा हिमालयी क्षेत्र संक्रमण काल से गुजर रहा है। इस क्षेत्र में नए भूस्खलन जोन बन-बिगड़ रहे हैं। यही नहीं पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ने से भूस्खलन जोन की स्थितियों में भी बदलाव हो रहा है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक 1905 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में आए बड़े भूकंप की वजह से पूरे पीरपंजाल रेंज की करीब 100 किलोमीटर तक की भूगर्भीय प्लेटें पहले ही टूट चुकी थीं। 2005 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बड़ा भूकंप आने के बाद यह हलचलें और तेज हो गई हैं।
भूगर्भीय हलचलों से निकलने वाली ऊर्जा से अधिक मिट्टी वाले पहाड़ों में कंपनों के कारण दरारें बन जाती हैं। बारिश में यही दरारें भूस्खलन का कारण बनती हैं। ऐसे ही कंपनों से सियाचिन और कारगिल के पहाड़ों में भी हिमस्खलन होता है।
भारतीय प्लेट चीन की प्लेट से टकरा रही है
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्रक्रिया करीब पांच करोड़ साल पहले तब शुरू हुई थी जब भारतीय प्लेट का चीन की प्लेट से टकराव शुरू हुआ। अनुमान है कि उस समय जम्मू-कश्मीर का हिस्सा आज के चेन्नई या बंगलूरू के पास रहा होगा।
वहां से लेकर चीन की सीमा तक गहरा समुद्र था। इस टकराव से जमीन के भीतर की प्लेटें टूट गईं और इनके टुकड़े मिट्टी के साथ ऊपर आ गए। इसी प्रक्रिया में पहाड़ बनते गए और ऊंचे होते गए। इन पहाड़ों पर बारिश से भूस्खलन और हिमस्खलन की प्रक्रिया चलती रही।
भारतीय प्लेट चीन की प्लेट से टकरा रही है। वैज्ञानिकों की मानें तो भारतीय प्लेट हिमालय के कश्मीर गैप में 3.8 सेंटीमीटर, सेंट्रल गैप में 4.3 सेंटीमीटर और असोम गैप में 4.8 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से ऊपर की तरफ खिसक रही है।
बढ़ रहा भूकंप का खतरा
हिमालयी क्षेत्र में कार्य कर रहे इटली, अमेरिका और जर्मनी के वैज्ञानिकों के शोध में पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ने के तथ्य का खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों की मानें तो इसके साथ ही भूकंप का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों वर्षों से सुषुप्त हिमालयी क्षेत्र की भूकंप पट्टियां जग गई हैं।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध करके इन भूकंपीय पट्टियों को चिह्नित किया है। इसके अलावा रिमोट सेंसिंग इंस्टीट्यूट ने भी भूकंपीय पट्टियों की रिपोर्ट दी है। भूस्खलन के संबंध में भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को मैप तैयार करके सौंपा है।