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घोटाले पे घोटाला: आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया

Sun, 09 Mar 2014 05:59 PM IST
Updated Sun, 09 Mar 2014 05:59 PM IST
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CAG report:  Fiscal Imbalance in J&K

जम्मू कश्मीर में सरकार का खर्च अधिक होने के कारण राज्य का विकास नहीं हो पा रहा है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ा घाटा बिजली सेक्टर से हो रहा है। सरकार ने हालांकि राजस्व बढ़ाने के लिए कई नए टैक्स लगाए हैं। इसके बावजूद 60 फीसदी राशि गैर योजना मद से खर्च किया जा रहा है।

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प्रमुख लेखाकार सुभाष चंद्र पांडे के अनुसार सरकार हर साल चार हजार करोड़ रुपये की बिजली खरीदती है और मात्र 15 सौ करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में वसूल पाती है। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नुकसान भी इस राज्य में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले में ज्यादा है। बिजली क्षेत्र में राजस्व वसूली में सिकिम्म के बाद जम्मू कश्मीर दूसरा ऐसा राज्य है, जहां सबसे कम वसूली होती है। सरकार ने वैट लगाकर और स्टांप ड्यूटी कानून में बदलाव करके राजस्व भी अधिक वसूला है। राज्य में वैट का दुरुपयोग भी हो रहा है। सेंट्रल टैक्स से राज्य को सामाजिक व्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जो रुपया मिलता है, वह भी गैर योजना मद में खर्च कर दिया जाता है। सेंट्रल सर्विस भी लागू नहीं हो रहा है।
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अगर चाहे तो इस टैक्स को लागू करके पांच से छह सौ करोड़ रुपये की आय बढ़ाई जा सकता है। वेतन, पेंशन, बिजली, सूद देने में ही 80 फीसदी खर्च हो जाता है। सरकार को आमदनी बढ़ाने के कई सुझाव दिए गए लेकिन इस पर कोई काम नहीं हुआ है। जिला, तहसील, ब्लाक और नियाबत बनाए जाने से भी सरकार का खर्चा बढ़ा है। विकास कार्यों पर सबसे कम खर्च हो रहा है। कृषि क्षेत्र का भी विकास नहीं हो पाया। सरकार की वित्त प्रशासनिक क्षमता कमजोर है और इसमें सुधार लाया जा सकता है।
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अतिक्रमणकारियों के प्रति नरम रवैया

CAG report:  Fiscal Imbalance in J&K

रिपोर्ट में सरकार पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च, 2013 तक बीस लाख कनाल से भी अधिक जमीन पर कब्जा हुआ। जो कोई भी अवैध तरीके से इन जमीन पर काबिज है या जिनका लीज का समय समाप्त हो गया या रोशनी एक्ट के तहत समय पर रुपया जमा नहीं कराया है, उनके खिलाफ सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। एक्ट के तहत दो साल के अंदर रुपया जमा कराना होता है।

उसे जमा नहीं कराया गया। कई जमीन हाथ से बनाए नक्शे पर ही अलाट कर दी गई। स्टांप ड्यूटी लिए बिना ही रजिस्ट्री के दस्तावेज पर गिरदावरी चढ़ा दी गई। श्रीनगर में 108 लोगों ने 160 कनाल जमीन में कब्जे कर रखा है। इनसे 38 करोड़ मांगे गए, जो नहीं मिले। बडगाम में 14,648 कनाल जमीन के आवेदन रद्द किए। इन्हें भी छुड़ाया नहीं गया।

कई निजी व्यक्तियों और ट्रस्ट मंदिर शिव जी सलोना, कश्मीर चैंबर आफ कामर्स, खिदमत ट्रस्ट, नवी सुबह ट्रस्ट, अहमदिया मस्जिद, हेमिस गोंपा और इदारा औकाफ गौसिया से बिना कोई पैसे लिए जमीन अलाट कर दी। नौकरशाहों ने भी विधायिका के समक्ष सही रिपोर्ट नहीं पेश की। राजस्व वसूली को लक्ष्य रखा गया था, जिसे हासिल नहीं किया जा सका।

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