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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Announcement of Padma Awards: Padma Bhushan to Ghulam Nabi Azad Prime Minister became emotional on his departure from Rajya Sabha

पद्म पुरस्कारों का एलान: जम्मू-कश्मीर से कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण, विश्वमूर्ति शास्त्री, फैसल को पद्मश्री

Tue, 25 Jan 2022 08:32 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 25 Jan 2022 08:32 PM IST
सार

पिछले साल राज्यसभा से गुलाम नबी आजाद की विदाई के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भावुक हो गए थे।

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Announcement of Padma Awards: Padma Bhushan to Ghulam Nabi Azad Prime Minister became emotional on his departure from Rajya Sabha
गुलाम नबी आजाद - फोटो : एएनआई-फाइल फोटो

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की झोली में चार पद्म सम्मान आए हैं। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण, जबकि शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में प्रोफेसर विश्वमूर्ति शास्त्री व खेल में उल्लेखनीय योगदान के लिए फैसल अली डार को पद्मश्री की उपाधि की घोषणा की गई है। लद्दाख से कला के क्षेत्र में शेरिंग नामग्याल को भी पद्मश्री मिला है। 

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गुलाम नबी आजाद: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिला से ताल्लुक रखने वाले गुलाम नबी आजाद का जन्म 7 मार्च 1949 को हुआ। आजाद ने प्राणि विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। 1980 में कश्मीर की एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित गायिका शमीन देव आजाद के साथ निकाह किया। इनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। वर्ष 1973 में कांग्रेस सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। इसके उपरांत उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। केंद्र तथा राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे।

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राजनीति में अतुलनीय योगदान

केंद्र में स्वास्थ्य, पर्यटन, नागरिक उड्डयन और संसदीय मामले के मंत्रालय संभाले। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में 21 सीटों पर जीत हासिल की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। हाल के दिनों में कांग्रेस नेतृत्व से बढ़ती दूरियों के बीच उन्हें पद्म सम्मान मिलने को लेकर चर्चाएं भी हो रही हैं। उन्हें जी-23 गुट का नेता माना जाता है। राज्यसभा से कार्यकाल समाप्त होने पर विदाई के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके तारीफ के पुल बांधे थे।

संस्कृत की सेवा व वेद को बढ़ावा दिया

प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री: उधमपुर जिले के कसूरी घोरडी रामनगर के मूल निवासी प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री को 44 साल तक संस्कृत की सेवा तथा संस्कृत व वेद के बढ़ावा के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने छह विषयों में जम्मू विश्वविद्यालय से शास्त्री की उपाधि हासिल की है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से पीएचडी करने के बाद 1967 में रघुनाथ संस्कृत महाविद्यालय में अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए। फिर केंद्र सरकार द्वारा इस महाविद्यालय को अपने अधीन लेने के बाद 1982 तक रिसर्च फेलो रहे। बाद में लेक्चरर, रीडर, विभागाध्यक्ष तथा प्रोफेसर बने।

हिमाचल में उन्होंने प्राचार्य पद पर भी काम किया। एक साल 2006 में वे जम्मू आ गए और यहां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राचार्य बने। वे श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल के निदेशक रहने के साथ ही दो बार से श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सदस्य हैं। वे काशी विद्वत परिषद की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने 2002 से अनौपचारिक संस्कृत शिक्षा का प्रचार प्रसार शुरू किया और 100 से अधिक केंद्रों का संचालन किया। उन्होने संस्कृत व वेद की 100 से अधिक छात्रों को निशुल्क शिक्षा दी। उनकी आठ पुस्तकें, 36 लेख प्रकाशित हैं। रंगमंच पर बेहतर प्रदर्शन के लिए 16 बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला है। प्रो. शास्त्री को राष्ट्रपति सम्मान के साथ ही साहित्य मार्तंड व वेद मार्तंड का सम्मान मिला है।

किक बॉक्सिंग में फहराया परचम

फैसल अली डार: उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के फैसल अली डार को खेलों को बढ़ावा देने के लिए पदम्श्री पुरस्कार की घोषणा की गई। किक बॉक्सिंग में वर्ष 2010 में पुणे में भारत का प्रतिनिधित्व कर सिल्वर मेडल जीता था। वह किक बॉक्सिंग के राष्ट्रीय स्तर के कोच भी हैं। वह कश्मीर के 8 जिलों में अली स्पोर्ट्स अकादमी चलाते हैं। जम्मू में भी जल्द ही इसकी शुरुआत की जाएगी। उनकी अकादमी में वर्तमान में करीब 13000 बच्चे पंजीकृत हैं जिन्हें मार्शल आर्ट्स के अलावा कुल 18 खेल सिखाए जाते हैं। उनकी अकादमी से करीब 7 अंतरराष्ट्रीय और 300 राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी निकले हैं। फैसल ने बताया कि उन्हें काफ ी ख़ुशी और गर्व महसूस हो रहा है कि कश्मीर के दूरदराज इलाके में होने के बावजूद भी उनके खेलों के प्रति योगदान को सरहा गया। 

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