पुलिस किमिऱ्येें से मजाक

Jammu and Kashmir Bureau Updated Sat, 11 Nov 2017 01:26 AM IST
जम्मू।
जम्मू कश्मीर पुलिस के कांस्टेबलों को मिलने वाले रिस्क अलाउंस के नाम पर मजाक किया जा रहा है। आतंकवाद ग्रस्त इलाकों, यहां हमेशा जान जाने का खतरा रहता है। वहां भी जवानों को रिस्क अलाउंस न के बराबर है। अन्य केंद्रीय पुलिस बल के मुकाबले रियासत पुलिस के जवानों को मिलने वाला अलाउंस न के बराबर है।
सीआरपीएफ के जवानों को कश्मीर में ड्यूटी देने पर प्रति माह 7500 रुपये रिस्क अलाउंस मिलता है। जबकि जम्मू कश्मीर पुलिस के कांस्टेबलों को मात्र 75 रुपये प्रति माह मिलता है। हेड कांस्टेबलों को 100 रुपये मिलता है। वहीं पुलिस के जवानों को हार्डशिप अलाउंस भी 10 फीसदी मिलती है। जबकि सीआरपीएफ जवानों को 20 फीसदी मिलती है। कश्मीर में चाहे खराब हालातों में ड्यूटी देनी हो या फिर आतंकवाद के खिलाफ चलने वाले आपरेशन में। दोनों ही जगहों पर सीआरपीएफ और पुलिस को बराबर ड्यूटी देनी पड़ती है। लेकिन सीआरपीएफ की तुलना में राज्य पुलिस को काफी कम सहूलियतें मिलती हैं। जबकि हर महीने कांस्टेबलों के वेतन से डेढ़ करोड़ रुपये पुलिस वेलफेयर फंड काटा जाता है।
एक पुलिस कांस्टेबल ने कहा कि आतंकवाद ग्रस्त इलाकों में ड्यूटी देने पर पता नहीं कब जान चली गई। लेकिन रिस्क अलाउंस कम है। हर दिन के हिसाब से देखा जाए तो तीन रुपये बनते हैं। जानी हमारी जान की कीमत तीन रुपये है। वहीं एक पुलिस के सीनियर अधिकारी का कहना है कि अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है। जल्द ही इस पर सहमति बन जाएगी।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Sonipat

नाबालिग को भगाने के बाद किया था दुष्कर्म, पांच दोषियों को सजा

नाबालिग को भगाने के बाद किया था दुष्कर्म, पांच दोषियों को सजा

24 फरवरी 2018

Related Videos

VIDEO: उड़ी सेक्टर में जारी पाकिस्तानी गोलाबारी, पलायन को मजबूर ग्रामीण

पाकिस्तान की ओर से शुक्रवार को भी उड़ी सेक्टर में गोलाबारी की गई। पाकिस्तानी गोलाबारी में बार्डर के आसपास के गांवों में बने कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए।

23 फरवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen