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सरकार की उदासीनता श्रमिकों पर भारी
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:34 AM IST
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कठुआ। सरकार की उदासीनता आम लोगों को ही नहीं, श्रमिकों पर भी भारी पड़ रही है। आलम यह है कि सरकार की योजनाओं का लाभ निर्माण श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा है। पहले जहां मैनुअल तौर पर श्रमिकों का कल्याणकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण किया जाता था, वहीं अब विभाग ने इस प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया है। वहीं, विभाग के पास भी पहाड़ी इलाकों से कितने श्रमिक पंजीकरण करवा चुके हैं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कठुआ श्रम विभाग कार्यालय में अभी तक मशीन न होने के कारण विभागीय कार्यालय में सितंबर 2016 से अब तक कोई भी पंजीकरण नहीं हुआ है। श्रमिकों की मानें तो विभाग बार बार अकारण फाइलें अटका रहा है। इसके कारण उनका पंजीकरण नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011-12 में कठुआ जिले में श्रमिक कल्याणकारी योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत भवन और निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें सरकार की ओर से योजना का लाभ दिया जाना था। इसके लिए तहसील और ब्लाक स्तर पर भी कार्यालय खोले जाने की योजना बनाई गई, लेकिन सरकारी उदासीनता का रवैया ऐसा रहा कि जिला मुख्यालय में ही अपनी इमारत योजना शुरू होने के चार साल बाद बन पाई। वहीं, जिले के पहाड़ी इलाकों में तो इमारत तो दूर अब तक कार्यालय भी नहीं खोला जा सका है। ऐसे में इन क्षेत्रों के श्रमिक अपना पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं।
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क्या है पंजीकरण करवाने का तरीका
श्रमिकों को पंजीकरण करवाने के लिए फार्म के साथ साथ आयु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड या आधार कार्ड, बैंक खाता और रोजगार प्रमाण पत्र की कापी देनी होता है। इसके लिए फाइल बनाकर विभाग के दफ्तर में जमा करवानी होती है। लेकिन अब तरीका डिजिटल हो गया है तो ऐसे में इन सब दस्तावेजों को अपलोड करना होता है। चूंकि श्रमिकों में 70 फीसदी कम पढ़े लिखे और इंटरनेट का ज्ञान नहीं रखने वाले हैं, ऐसे में डिजिटल प्रक्रिया उनके लिए टेढ़ी खीर है।
क्या मिलता है लाभ
कल्याणकारी योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मेडिकल, संस्कार, सड़क हादसे, मृत, पुरानी बीमारी की सूरत में मदद मिलती है। इसमें शादी के लिए भी सहायता मिलती थी, लेकिन वर्तमान में इस सहायता को बंद कर दिया गया है।
जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी मुश्किल
वर्तमान में कठुआ स्थित लेबर सराय की इमारत में लेबर विभाग का दफ्तर है। पूरी इमारत विभाग की अपनी है और इसी इमारत में पंजीकरण का काम होता है,। बिलावर, बसोहली, बनी और डुग्गन सहित कई पहाड़ी इलाकों में कार्यालय नहीं है। इन इलाकों के लोगों को योजना की जानकारी नहीं है। ऐसे में इन इलाकों से पंजीकृत श्रमिकों की संख्या न के बराबर है। इसका एक बड़ा कारण श्रम विभाग की इस स्कीम का लाभ लेने के लिए श्रमिकों को कठुआ स्थित कार्यालय तक पहुंचना भी है। हालांकि, सरकार के पास इस योजना को सही मकसद तक पहुंचाने के लिए तहसील और ब्लाक स्तर पर कार्यालय खोलने का भी प्रस्ताव था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
क्या कहती है फेडरेशन
आल इंडिया वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सदस्य राजकुमार ने बताया कि कल्याणकारी योजना का लाभ पंजीकृत श्रमिकों को नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जितने श्रमिक पंजीकृत हुए हैं, उनमें केवल तीस प्रतिशत को ही लाभ रहा होगा। पैसा खर्च करने में सरकार बहुत ही लापरवाह है। हालांकि, केंद्र से पैसा मिल जाता है लेकिन राज्य सरकार पैसा नहीं खर्च कर रही। राज्य सरकार ने अब तक मात्र 2.5 करोड़ श्रमिकों को ही पंजीकृत किया है जबकि 6 करोड़ से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण अभी बकाया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर विभाग आयु प्रमाण पत्र के लिए ही कई रोड़े अड़ा देता है। एक बार जब पंजीकरण के लिए प्रमाण पत्र दिया तो जब लाभ लेेने के लिए पैसे देने होते हैं तो विभाग फिर से प्रमाण पत्र मांगता है। इसकी कारण श्रमिकों को बार बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
रोजगार प्रमाण पत्र के लिए किया संघर्ष
पंजीकरण के लिए सबसे बड़ा रोड़ा रोजगार प्रमाण पत्र का था, जिसे संघर्ष के बाद अब जाकर दूर किया गया है। ग्रामीण विकास विभाग की मनरेगा योजना के साथ काम कर रहे श्रमिकों को तो आसानी से रोजगार प्रमाण पत्र मिल जाता है लेकिन किसी के घर पर और इमारतों के निर्माण के लिए श्रम कर रहे श्रमिकों को इसके लिए दर-दर भटकना पड़ता है। वर्तमान में वेलफेयर बोर्ड ने जिस स्थान पर श्रमिक कार्य कर रहा है, वहां के मालिक से प्रमाण पत्र बनाकर देने की बात मान ली है।
श्रमिकों को वित्तीय सहायता देकर सक्षम बनाने की योजना जारी है। फिलहाल, जिले में किसी भी तहसील में कोई अन्य दफ्तर नहीं है। कठुआ में ही एकमात्र दफ्तर है और यहीं से सारा कामकाज चलता है। इस बात का संज्ञान लिया गया है कि पहाड़ी इलाकों में श्रमिकों से पैसे ऐंठने का काम ऐसा कहकर किया जाता है। हां, तहसील स्तर पर पोस्ट सृजित करने के बारे में विचार किया जा रहा है लेकिन अभी तक इस पर भी कोई ठोस काम नहीं हो पाया है। पंजीकरण के लिए श्रमिकों को अपने स्तर पर ही पंजीकरण करवाना है। डिजिटल पंजीकरण के लिए विभाग के पास जरूरी मशीने नहीं है। इसलिए विभागीय कार्यालय में पंजीकरण नहीं हो रहा है। बाकी श्रमिकों की हर समस्या का समाधान किया जाता है।
-सोनम वर्मा, सहायक श्रम आयुक्त
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कठुआ श्रम विभाग कार्यालय में अभी तक मशीन न होने के कारण विभागीय कार्यालय में सितंबर 2016 से अब तक कोई भी पंजीकरण नहीं हुआ है। श्रमिकों की मानें तो विभाग बार बार अकारण फाइलें अटका रहा है। इसके कारण उनका पंजीकरण नहीं हो पा रहा है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2011-12 में कठुआ जिले में श्रमिक कल्याणकारी योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत भवन और निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें सरकार की ओर से योजना का लाभ दिया जाना था। इसके लिए तहसील और ब्लाक स्तर पर भी कार्यालय खोले जाने की योजना बनाई गई, लेकिन सरकारी उदासीनता का रवैया ऐसा रहा कि जिला मुख्यालय में ही अपनी इमारत योजना शुरू होने के चार साल बाद बन पाई। वहीं, जिले के पहाड़ी इलाकों में तो इमारत तो दूर अब तक कार्यालय भी नहीं खोला जा सका है। ऐसे में इन क्षेत्रों के श्रमिक अपना पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं।
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क्या है पंजीकरण करवाने का तरीका
श्रमिकों को पंजीकरण करवाने के लिए फार्म के साथ साथ आयु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड या आधार कार्ड, बैंक खाता और रोजगार प्रमाण पत्र की कापी देनी होता है। इसके लिए फाइल बनाकर विभाग के दफ्तर में जमा करवानी होती है। लेकिन अब तरीका डिजिटल हो गया है तो ऐसे में इन सब दस्तावेजों को अपलोड करना होता है। चूंकि श्रमिकों में 70 फीसदी कम पढ़े लिखे और इंटरनेट का ज्ञान नहीं रखने वाले हैं, ऐसे में डिजिटल प्रक्रिया उनके लिए टेढ़ी खीर है।
क्या मिलता है लाभ
कल्याणकारी योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मेडिकल, संस्कार, सड़क हादसे, मृत, पुरानी बीमारी की सूरत में मदद मिलती है। इसमें शादी के लिए भी सहायता मिलती थी, लेकिन वर्तमान में इस सहायता को बंद कर दिया गया है।
जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी मुश्किल
वर्तमान में कठुआ स्थित लेबर सराय की इमारत में लेबर विभाग का दफ्तर है। पूरी इमारत विभाग की अपनी है और इसी इमारत में पंजीकरण का काम होता है,। बिलावर, बसोहली, बनी और डुग्गन सहित कई पहाड़ी इलाकों में कार्यालय नहीं है। इन इलाकों के लोगों को योजना की जानकारी नहीं है। ऐसे में इन इलाकों से पंजीकृत श्रमिकों की संख्या न के बराबर है। इसका एक बड़ा कारण श्रम विभाग की इस स्कीम का लाभ लेने के लिए श्रमिकों को कठुआ स्थित कार्यालय तक पहुंचना भी है। हालांकि, सरकार के पास इस योजना को सही मकसद तक पहुंचाने के लिए तहसील और ब्लाक स्तर पर कार्यालय खोलने का भी प्रस्ताव था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
क्या कहती है फेडरेशन
आल इंडिया वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय सदस्य राजकुमार ने बताया कि कल्याणकारी योजना का लाभ पंजीकृत श्रमिकों को नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जितने श्रमिक पंजीकृत हुए हैं, उनमें केवल तीस प्रतिशत को ही लाभ रहा होगा। पैसा खर्च करने में सरकार बहुत ही लापरवाह है। हालांकि, केंद्र से पैसा मिल जाता है लेकिन राज्य सरकार पैसा नहीं खर्च कर रही। राज्य सरकार ने अब तक मात्र 2.5 करोड़ श्रमिकों को ही पंजीकृत किया है जबकि 6 करोड़ से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण अभी बकाया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर विभाग आयु प्रमाण पत्र के लिए ही कई रोड़े अड़ा देता है। एक बार जब पंजीकरण के लिए प्रमाण पत्र दिया तो जब लाभ लेेने के लिए पैसे देने होते हैं तो विभाग फिर से प्रमाण पत्र मांगता है। इसकी कारण श्रमिकों को बार बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
रोजगार प्रमाण पत्र के लिए किया संघर्ष
पंजीकरण के लिए सबसे बड़ा रोड़ा रोजगार प्रमाण पत्र का था, जिसे संघर्ष के बाद अब जाकर दूर किया गया है। ग्रामीण विकास विभाग की मनरेगा योजना के साथ काम कर रहे श्रमिकों को तो आसानी से रोजगार प्रमाण पत्र मिल जाता है लेकिन किसी के घर पर और इमारतों के निर्माण के लिए श्रम कर रहे श्रमिकों को इसके लिए दर-दर भटकना पड़ता है। वर्तमान में वेलफेयर बोर्ड ने जिस स्थान पर श्रमिक कार्य कर रहा है, वहां के मालिक से प्रमाण पत्र बनाकर देने की बात मान ली है।
श्रमिकों को वित्तीय सहायता देकर सक्षम बनाने की योजना जारी है। फिलहाल, जिले में किसी भी तहसील में कोई अन्य दफ्तर नहीं है। कठुआ में ही एकमात्र दफ्तर है और यहीं से सारा कामकाज चलता है। इस बात का संज्ञान लिया गया है कि पहाड़ी इलाकों में श्रमिकों से पैसे ऐंठने का काम ऐसा कहकर किया जाता है। हां, तहसील स्तर पर पोस्ट सृजित करने के बारे में विचार किया जा रहा है लेकिन अभी तक इस पर भी कोई ठोस काम नहीं हो पाया है। पंजीकरण के लिए श्रमिकों को अपने स्तर पर ही पंजीकरण करवाना है। डिजिटल पंजीकरण के लिए विभाग के पास जरूरी मशीने नहीं है। इसलिए विभागीय कार्यालय में पंजीकरण नहीं हो रहा है। बाकी श्रमिकों की हर समस्या का समाधान किया जाता है।
-सोनम वर्मा, सहायक श्रम आयुक्त