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पाकिस्तानी गोलाबारी से सहमें ग्रामीण
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
राजोरी।
नियंत्रण रेखा पर बार-बार पाक सेना द्वारा गोलाबारी करने से नियंत्रण रेखा से सटे ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। नौशेरा सब डिवीजन के नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में पाक की गोलाबारी के चलते लोग बहुत सहमे व डरे हुए हैं। इतना ही नहीं पांच गांवों के लोगों को शिफ्ट कर नौशेरा में बनाए गए राहत शिविरों में रखा गया है। अन्य सभी गांव के लोग दहशत के साए में अभी जी रहे हैं। नौशेरा के सैर, मकड़ी, कलसियां, भवानी, लाम, कलाल, घनियां, पुखरनी, झांगड़, नंब, खंबा, ऐसे गांव हैं जहां पाक सेना की गोलाबारी सबसे अधिक होती है। इन गांवो में पक्के बंकर बनाने की सरकार की योजना पिछले कई वर्षों से चल रही है, लेकिन अभी तक बंकर बनाने का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इन इलाकों के लोगों को जहां एक तरफ अपने बच्चों के भ्वष्यि की चिंता सता रही है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी फसलें बरबाद होने का डर भी सता रहा है। अपने पशुओं को लेकर भी लोग बहुत चिंतत हैं।
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राजोरी।
नियंत्रण रेखा पर बार-बार पाक सेना द्वारा गोलाबारी करने से नियंत्रण रेखा से सटे ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। नौशेरा सब डिवीजन के नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में पाक की गोलाबारी के चलते लोग बहुत सहमे व डरे हुए हैं। इतना ही नहीं पांच गांवों के लोगों को शिफ्ट कर नौशेरा में बनाए गए राहत शिविरों में रखा गया है। अन्य सभी गांव के लोग दहशत के साए में अभी जी रहे हैं। नौशेरा के सैर, मकड़ी, कलसियां, भवानी, लाम, कलाल, घनियां, पुखरनी, झांगड़, नंब, खंबा, ऐसे गांव हैं जहां पाक सेना की गोलाबारी सबसे अधिक होती है। इन गांवो में पक्के बंकर बनाने की सरकार की योजना पिछले कई वर्षों से चल रही है, लेकिन अभी तक बंकर बनाने का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इन इलाकों के लोगों को जहां एक तरफ अपने बच्चों के भ्वष्यि की चिंता सता रही है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी फसलें बरबाद होने का डर भी सता रहा है। अपने पशुओं को लेकर भी लोग बहुत चिंतत हैं।