फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Worlds longest cannon Jaiwan will be preserved in Jaigarh Fort once used 100 kg gun powder

दुनिया की सबसे लंबी तोप : जयगढ़ किले में संरक्षित होगी 'जयवाण', एक बार इस्तेमाल में लगता था 100 किलो गन पाउडर

Sat, 28 Aug 2021 10:51 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sat, 28 Aug 2021 10:51 AM IST
सार

जयवाण तोप को 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। जानकारी के मुताबिक इस तोप का वजन करीब 50 टन के आसपास है। 

विज्ञापन
Worlds longest cannon Jaiwan will be preserved in Jaigarh Fort once used 100 kg gun powder
jainvan cannon - फोटो : ANI

विस्तार

भारत का इतिहास कई युद्धों से भरा पड़ा है। बड़ी-बड़ी लड़ाईयां, कई शूरवीर यहां की मिट्टी ने दिए हैं। भले ही आज के आधुनिक हथियारों के मामले में भारत अन्य देशों से कुछ पीछे हो, लेकिन जब बात राजा-महाराजाओं के समय की आती है तब भारत के शस्त्रागार का कोई सानी नहीं होता। 

विज्ञापन

एक से एक तलवार, भाले, ढ़ाल भारतीय शूरवीरों के शस्त्रागार की शोभा हुआ करती थीं। महाराणा प्रताप हों या फिर टीपू सुल्तान, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई हों या तात्या टोपे सभी के विरले हथियार आज भी भारतीय संग्रहालयों में सुरक्षित रखे गए हैं। ऐसी ही एक खतरनाक तोप है- जयवाण तोप। 18वीं शताब्दी में बनी यह तोप दुनिया की सबसे लंबी तोप है, जो अब जयपुर के जयगढ़ किले में संरक्षित रहेगी। 
विज्ञापन


एक बार इस्तेमाल के लिए लगता था 100 किलो गन पाउडर 
जयपुर किले के मैनेजर भंवर सिंह ने शनिवार को एएनआई को बताया कि जयवाण तोप दुनिया की सबसे लंबी तोप है। यह 1720 में बनाई गई थी। इसक वजन 50 टन के करीब है। उन्होंने बताया कि जयवाण तोप को एक बार इस्तेमाल करने के लिए 100 किलोग्राम गन पाउडर की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि यह तोप इतनी खतरनाक थी कि इसे शुरुआत से जगगढ़ किले में ही रखा गया, जिससे कोई दूसरा इसका इस्तेमाल न कर सके। 

युद्ध में कभी नहीं हुआ इस्तेमाल 
जयवाण तोप को बनाया तो युद्ध में इस्तेमाल के लिए गया था, लेकिन यह इतनी खतरनाक थी कि इसे कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। इतिहासकारों की मानें तो जयवाण तोप इतनी भारी थी कि यह कभी दूसरे स्थान पर नहीं ले जाई गई। इस तोप की मारक क्षमता करीब 35 किलोमीटर तक थी। पहली बार जब इसका प्रयोग टेस्टिंग के तौर पर किया गया तो इसका गोला 35 किलोमीटर दूर जाकर गिरा, जहां बड़ा सा तालाब बन गया था। कई इतिहासकारों का दावा है कि इसलिए इसको चलाने से पहले आसपास तीन अन्य तोपें रखी गईं थीं, जिससे इसकी तरंगों से बचा जा सके। इसके बावजूद तोप के पास खड़े हाथी की मौत हो गई थी। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed