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एड्स रोगियों के कल्याण के लिए क्यों नहीं बनाए नियम, नोटिस जारी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 06 Nov 2017 08:37 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एचआईवी एक्ट 2017 के लागू होने के बावजूद अब तक एड्स रोगियों के इलाज के लिए नियम नहीं बनाने पर राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश बृजेश दुबे की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता शामिली श्योराण ने अदालत को बताया कि एचआईवी कानून गत अप्रैल माह में लागू हो चुका है। राज्य सरकार को इसके तहत रोगियों के लिए नियम बनाने थे। कई माह गुजरने के बावजूद अब तक सरकार ने नियम नहीं बनाए हैं। याचिका में कहा गया कि प्रदेश एड्स के मामले में देशभर में सातवें नंबर पर आता है। यहां रोजाना पांच एड्स रोगी सामने आते हैं या उनकी मौत होती है।
इसके बावजूद जयपुर और जोधपुर में एड्स रोगी का प्रारंभिक इलाज टीबी के रोगियों के साथ ही किया जा रहा है। वहीं दूसरे चरण का इलाज जयपुर में उपलब्ध ही नहीं है। इसके लिए मरिजों को दिल्ली या मुंबई जाना पड़ता है। याचिका में गुहार की गई है कि एड्स मरीजों के कल्याण के लिए एचआईवी नियम बनाए जाएं।
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जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश बृजेश दुबे की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता शामिली श्योराण ने अदालत को बताया कि एचआईवी कानून गत अप्रैल माह में लागू हो चुका है। राज्य सरकार को इसके तहत रोगियों के लिए नियम बनाने थे। कई माह गुजरने के बावजूद अब तक सरकार ने नियम नहीं बनाए हैं। याचिका में कहा गया कि प्रदेश एड्स के मामले में देशभर में सातवें नंबर पर आता है। यहां रोजाना पांच एड्स रोगी सामने आते हैं या उनकी मौत होती है।
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इसके बावजूद जयपुर और जोधपुर में एड्स रोगी का प्रारंभिक इलाज टीबी के रोगियों के साथ ही किया जा रहा है। वहीं दूसरे चरण का इलाज जयपुर में उपलब्ध ही नहीं है। इसके लिए मरिजों को दिल्ली या मुंबई जाना पड़ता है। याचिका में गुहार की गई है कि एड्स मरीजों के कल्याण के लिए एचआईवी नियम बनाए जाएं।
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जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।