{"_id":"59b296a04f1c1bfb7f8b50ed","slug":"tiger-s-roar-will-be-heard-in-three-months-later","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान में यहां भी तीन महीने बाद सुनाई देगी टाइगर की दहाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्थान में यहां भी तीन महीने बाद सुनाई देगी टाइगर की दहाड़
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 08 Sep 2017 06:39 PM IST
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प्रदेश के तीसरे टाइगर रिजर्व एरिया में तीन महीने बाद जल्द ही टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। इसके लिए यहां कवायद तेज हो गई है।
कोटा संभाग में बनाए जा रहे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर लाने की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जी.वी. रेड्डी ने आज वन और वन्यजीव प्रेमियों के साथ बैठक की। दो घंटे चली इस बैठक में टाइगर को एरिया में छोड़ने से पहले की समस्याओं और सुझावों को लेकर चर्चा हुई। वन्यजीव प्रेमियों ने वनक्षेत्र में मौजूद गांवो की शिफ्टिंग, अवैध गतिविधियों के साथ प्रीबेस को मजबूत करने के संबंध में अपनी बात रखी।
रिजर्व एरिया के डीएफओ एस.आर. यादव ने वन विभाग द्वारा अभी तक किए गए प्रयासों के संबंध में जानकारी दी और टाइगर लाने से लेकर उसे यहां क्षेत्र में छोड़ने तक की पूरी कार्ययोजना के बारे में बताया। बैठक में मौजूद पूर्व मंत्री भरतसिंह ने गांवों की शिफ्टिंग और वनक्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोटा में वन विभाग के पास काफी जमीन खाली पड़ी है और यदि एरिया में मौजूद ग्रामीणों को उस जमीन पर शिफ्ट कर दिया जाता है तो वन विभाग को गांव खाली करवाने में काफी आसानी हो जाएगी।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जी.वी.रेड्डी ने बाघों को बसाने के लिए मिले सभी सुझावों को नोट किया और इसमें अच्छे सुझाव की पालना के संबंध में अधिकारियो को निर्देश भी दिए।
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कोटा संभाग में बनाए जा रहे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर लाने की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जी.वी. रेड्डी ने आज वन और वन्यजीव प्रेमियों के साथ बैठक की। दो घंटे चली इस बैठक में टाइगर को एरिया में छोड़ने से पहले की समस्याओं और सुझावों को लेकर चर्चा हुई। वन्यजीव प्रेमियों ने वनक्षेत्र में मौजूद गांवो की शिफ्टिंग, अवैध गतिविधियों के साथ प्रीबेस को मजबूत करने के संबंध में अपनी बात रखी।
रिजर्व एरिया के डीएफओ एस.आर. यादव ने वन विभाग द्वारा अभी तक किए गए प्रयासों के संबंध में जानकारी दी और टाइगर लाने से लेकर उसे यहां क्षेत्र में छोड़ने तक की पूरी कार्ययोजना के बारे में बताया। बैठक में मौजूद पूर्व मंत्री भरतसिंह ने गांवों की शिफ्टिंग और वनक्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोटा में वन विभाग के पास काफी जमीन खाली पड़ी है और यदि एरिया में मौजूद ग्रामीणों को उस जमीन पर शिफ्ट कर दिया जाता है तो वन विभाग को गांव खाली करवाने में काफी आसानी हो जाएगी।
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जी.वी.रेड्डी ने बाघों को बसाने के लिए मिले सभी सुझावों को नोट किया और इसमें अच्छे सुझाव की पालना के संबंध में अधिकारियो को निर्देश भी दिए।
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