फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   these daughters were becomed minister after child marriage protest

ये बेटियां बाल विवाह के दलदल से निकलकर बनी 'मंत्री'

Sun, 23 Apr 2017 06:27 PM IST
मनीष कुमार शर्मा/जयपुर
मनीष कुमार शर्मा/जयपुर Updated Sun, 23 Apr 2017 06:27 PM IST
विज्ञापन
these daughters were becomed minister after child marriage protest
मंत्री भदेल के साथ तीनों बेटियां - फोटो : amar ujala
प्रदेश में शादी के सावे शुरू होते ही गांव—ढाणियों में बाल विवाह की खबरें भी सुनने को मिल रही हैं। हम आपको ऐसी बेटियों से मिलवाते हैं जिन्होंने बाल विवाह के दंश को झेला और उस दलदल से बाहर निकलकर एक दिन की मंत्री भी बनी।
विज्ञापन


दरअसल, राजस्थान के राजसमंद के बागोल की रहने वाली जसोदा गमेती की शादी उसके परिजनों ने छह साल की उम्र में ही कर दी थी। छोटी उम्र में शादी होने के बाद जैसे ही जसोदा पन्द्रह साल की हुई, उसे ससुराल में भेज दिया गया। उसने बताया कि इसके लिए उसे कहा गया कि कुछ समय वहां रह आओ और फिर वापस आ जाना। ऐसे आए दिन चलने के बाद जसोदा इस रूटीन से तंग आ गई। सुसराल आने के बाद से उसने आए दिन पति और ससुराल वालों के ताने सुनकर इस दलदल से बाहर निकलने का फैसला किया।
विज्ञापन


अब तो केवल उसका एक ही मकसद था कि कैसे भी हो उसे इस बाल विवाह के दंश को और नहीं झेलना। इसी दौरान उसकी मुलाकात महिला मंच की सदस्यों से हुई। जसोदा ने अपनी आपबीती मंच की सदस्यों को बताई, जिसके बाद से उसे अपनी नई जिंदगी को शुरुआत करने की प्रेरणा मिली। वजेराम गमेती की इस बेटी ने जाति के पंचों से लड़कर, फिर पति और ससुराल वालों का विरोध करके अपनी बचपन की शादी को गलत करार दिलवाया। इसके बाद जैसे ही जसोदा बालिग हुई उसने इस सम्बंध में न्यायालय में परिवाद दायर किया, जहां से कानूनन उसके बाल विवाह को निषेध घोषित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बेटी के इसी साहस को देखते हुए प्रदेश के महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिदा भदेल ने उसे अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर एक दिन का मंत्री बनाया। आज ये जसोदा बाल विवाह के बंधन में बंधने जा रही सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

सोना ने कहा, पहले पढ़ाई पूरी करूंगी

these daughters were becomed minister after child marriage protest
डेमो इमेज
राजस्थान की महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल ने जसोदा के साथ ही अन्य दो बेटियों को भी एक दिन का मंत्री बनाया था, जिनमें टोंक जिले की रहने वाली सोना बैरवा और प्रीति कंवर राजावत भी शामिल रहीं।

सोना बैरवा ने बताया कि छह साल की उम्र में उसकी भी शादी कर दी गई थी। जैसे—जैसे उसमें समझ बढ़ी उसने अन्य लड़कियों की दशा देखी जो बाल विवाह के कारण हुई थी। इससे उसमें हिम्मत आई और उसने उच्च शिक्षा हासिल करने का निर्णय लिया। गौना होने पर उसके ससुराल वाले लेने के लिए आए तो सोना ने कहा कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी करेगी। ऐसा नहीं करने पर उसके पति चाहे तो तलाक ले सकते हैं। इसके बाद पिछले साल उसके पति ने उससे तलाश का फैसला कर ही लिया। आज सोना ने बीएड की शिक्षा ग्रहण कर ली है और शिक्षक बनने की तैयारी कर रही है।

प्रीती कंवर के माता-पिता ने भी 16 साल की उम्र में उसकी शादी तय कर दी थी। उसने शादी करने से इनकार कर दिया और अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया। आज उसने अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी कर ली और शिक्षक के रूप में काम कर रही है। उसने अपने गांव में कई बाल विवाह बंद कर दिए हैं।

गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में 15.6% लड़कियों की शादी से 10 से 19 वर्ष की आयु के बीच हो जाती है, जो चिंतनीय है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन अब तो व्हाट्स ग्रुप के जरिये भी राजस्थान में होने वाले बाल विवाह पर नजर रखता है ताकि उन्हें रोका जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed