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ऐसा स्कूल, जहां पीने के पानी के लिए बच्चे ही इकट्ठा करते हैं 'चंदा'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 30 Aug 2017 03:39 PM IST
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राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय
- फोटो : amar ujala
सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करती हो, लेकिन हकीकत इसके उलट है। हमारी पड़ताल में ऐसा स्कूल सामने आया है जहां पीने का पानी भी नहीं है। जिसके चलते यहां पढ़ने वाले बच्चों को ही पैसा एकत्रित कर पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ती है।
दरअसल, ये सरकारी स्कूल है राजस्थान के अलवर जिले में। यहां किशनगढ़ बास उपखण्ड स्थित ग्राम रायपुर मेवान के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पिछले करीब 10 माह से पीने के पानी की भारी समस्या बनी हुई है। हालात ये हैं कि कभी कोई बच्चा तो कभी कोई यहां अपने घर से पीने के पानी का टेंकर डलवाने के लिए पैसा इकट्ठा करके लाता है तब जाकर पेयजल की व्यवस्था हो पाती है। यहीं नहीं, कई बच्चे अपने घर से पानी की बोतल साथ लाते हैं और ये खत्म हो जाती है तो प्यासे ही रहकर दिन गुजारना पड़ता है।
उधर, अभिभावकों का कहना है कि ऐसे हालात में हम अपने बच्चों को यहां पढ़ाने की कैसे सोंचे। यदि पेयजल व्यवस्था सुचारू नहीं होती है तो मजबूरन उन्हें बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में उन पर आर्थिक भार भी बढ़ेगा।
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दरअसल, ये सरकारी स्कूल है राजस्थान के अलवर जिले में। यहां किशनगढ़ बास उपखण्ड स्थित ग्राम रायपुर मेवान के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पिछले करीब 10 माह से पीने के पानी की भारी समस्या बनी हुई है। हालात ये हैं कि कभी कोई बच्चा तो कभी कोई यहां अपने घर से पीने के पानी का टेंकर डलवाने के लिए पैसा इकट्ठा करके लाता है तब जाकर पेयजल की व्यवस्था हो पाती है। यहीं नहीं, कई बच्चे अपने घर से पानी की बोतल साथ लाते हैं और ये खत्म हो जाती है तो प्यासे ही रहकर दिन गुजारना पड़ता है।
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उधर, अभिभावकों का कहना है कि ऐसे हालात में हम अपने बच्चों को यहां पढ़ाने की कैसे सोंचे। यदि पेयजल व्यवस्था सुचारू नहीं होती है तो मजबूरन उन्हें बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना पड़ेगा। ऐसे में उन पर आर्थिक भार भी बढ़ेगा।
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अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधि तक कराया अवगत
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय
- फोटो : amar ujala
स्कूल प्रधानाध्यापक पतराम का कहना है कि स्कूल में करीब 10 माह से पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। इसको लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियो को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। स्कूल के बच्चे अपने साथ पानी बोतल लेकर आते हैं, जो खत्म हो जाने के बाद उन्हें वापस अपने घर जाना पड़ता है। स्कूल गांव से काफी दूर होने के कारण बच्चे वापस स्कूल नहीं आ पाते। विद्यालय प्रशासन ने विभाग, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से कई बार लिखित व मौखिक रूप से निवेदन किया है, लेकिन किसी ने भी इस बात को लेकर गंभीरता नही दिखाई।