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राजस्थान में यहां आकर लैला मजनू ने दे दी थी जान..पढ़िए उनकी कहानी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 14 May 2017 02:42 PM IST
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- फोटो : Internet
हिंदी फिल्मों के गीतों में आपने प्रेमी जोड़े लैला और मजनू का जिक्र जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की कि आखिर जिनके प्यार की मिसालें दी जाती हैं वो लैला मजनू आखिर थे कौन और कैसी थी उनके प्यार की कहानी।
राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित अनूपगढ़ तहसील में लैला मजनू की मजारें प्रेम और धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के चलते लोगों को भाईचारे और सद्भाव से रहने की सीख देती है। हर साल जून माह में यहां लैला मजनू मेला भी लगता है जहां बड़ी संख्या में प्रेमी जोड़े अपने अपने प्यार की सलामती की दुआएं मांगने आते हैं और मजार के सामने मत्था टेककर जीवनभर एक दूजे का साथ निभाने की कसमें भी खाते हैं।
हिंदू हो या मुस्लिम समुदाय दोनों पक्ष के लोगों में इन मजारों को लेकर गहरी आस्था के चलते सुमदाय के लोगों ने मजार का जीर्णोद्धार कार्य भी कराया है। हालांकि कुछ लोगों का कहना यह भी है कि ये मजार किसी लैला मजनू की नहीं किसी पीर फकीर की है।
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भारत पाकिस्तान सीमा के करीब होने के कारण इन मजारों से कई रोचक तथ्य भी जुड़े हैं पहला तो ये कि यहां से पाकिस्तान महज दो किलोमीटर की दूरी पर है वहीं यहांं पर तैनात भारतीय सेना की एक चौकी का नाम मजनू की चौकी रखा गया है।
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राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित अनूपगढ़ तहसील में लैला मजनू की मजारें प्रेम और धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के चलते लोगों को भाईचारे और सद्भाव से रहने की सीख देती है। हर साल जून माह में यहां लैला मजनू मेला भी लगता है जहां बड़ी संख्या में प्रेमी जोड़े अपने अपने प्यार की सलामती की दुआएं मांगने आते हैं और मजार के सामने मत्था टेककर जीवनभर एक दूजे का साथ निभाने की कसमें भी खाते हैं।
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हिंदू हो या मुस्लिम समुदाय दोनों पक्ष के लोगों में इन मजारों को लेकर गहरी आस्था के चलते सुमदाय के लोगों ने मजार का जीर्णोद्धार कार्य भी कराया है। हालांकि कुछ लोगों का कहना यह भी है कि ये मजार किसी लैला मजनू की नहीं किसी पीर फकीर की है।
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भारत पाकिस्तान सीमा के करीब होने के कारण इन मजारों से कई रोचक तथ्य भी जुड़े हैं पहला तो ये कि यहां से पाकिस्तान महज दो किलोमीटर की दूरी पर है वहीं यहांं पर तैनात भारतीय सेना की एक चौकी का नाम मजनू की चौकी रखा गया है।
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मोहब्बत में जान देने वाले लैला मजनू की कब्र
- फोटो : Internet
लैला मजनू जीते जी एकदूजे के कभी ना हो सके। कालांतर के किस्सों पर गौर करें तो बताया जाता है कि लैला और मजनू ने अपने प्यार में विफल होने पर राजस्थान के इसी गांव में आकर अपनी जान दे दी थी। दोनों की मौत हो जाने के बाद गांववालों ने उन्हें एकदूसरे के पास ही दफना दिया था।
यहां लैला मजनू की मौत के बाद के पीछे कई किस्से सुनाए जाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के प्यार का पता चला तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आखिर उसने निर्ममता से मजनू की हत्या कर दी।
लैला को जब इस बात का पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और वहीं उसने खुदकुशी करके अपनी जान दे दी। कहने वाले ये भी कहते हैं जब दोनों के परिवार वालों और समाज ने उनके प्यार को नहीं अपनाया तो दोनों ने इससे तंग आकर अपनी जान दे दी थी। वहीं कहा यह भी जाता है कि लैला मजनू घर से भाग गए थे और राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाके में आ पहुंचे जहां प्यास से इन दोनों की मौत हो गई।
यहां लैला मजनू की मौत के बाद के पीछे कई किस्से सुनाए जाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के प्यार का पता चला तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आखिर उसने निर्ममता से मजनू की हत्या कर दी।
लैला को जब इस बात का पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और वहीं उसने खुदकुशी करके अपनी जान दे दी। कहने वाले ये भी कहते हैं जब दोनों के परिवार वालों और समाज ने उनके प्यार को नहीं अपनाया तो दोनों ने इससे तंग आकर अपनी जान दे दी थी। वहीं कहा यह भी जाता है कि लैला मजनू घर से भाग गए थे और राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाके में आ पहुंचे जहां प्यास से इन दोनों की मौत हो गई।