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नौकरी लगाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी की जांच अब एसओजी करेगी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 23 Aug 2017 08:23 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने रेलवे और एफसीआई में नौकरी लगाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए ठगने के मामले की जांच एसओजी को सौंप दी है। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी के आचरण की भी जांच करने को कहा है।
अदालत ने आदेश की कॉपी एसओजी के आईजी को भेजते हुए कहा कि यदि पूर्व के जांच अधिकारी की लापरवाही या दुर्भावना पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई कर अदालत में रिपोर्ट पेश की जाए। न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश गौतम शर्मा की ओर से दायर जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी रमेश सिनसिनवार अदालत में पेश हुए।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता सुदेश सैनी ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने कई लोगों को रेलवे और एफसीआई में नौकरी लगाने के नाम पर छह-छह लाख रुपए की ठगी की है। इसके साथ ही कई लोगों को कोलकाता ले जाकर फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिए हैं। आरोपियों ने अलवर के अलवा अन्य स्थानों पर भी ऐसी ठगी की है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच में कई लागों से ठगी की बात साबित हुई है, लेकिन पीड़ित बयान देने सामने नहीं आ रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि पीड़ितों का सामने नहीं आने का तर्क उचित प्रतीत नहीं होता। ऐसा लगता है कि बहुत बड़ा गिरोह नौकरी के नाम पर बेरोजगारों को ठग रहा है। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एसओजी को जांच सौंप दी है।
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अदालत ने आदेश की कॉपी एसओजी के आईजी को भेजते हुए कहा कि यदि पूर्व के जांच अधिकारी की लापरवाही या दुर्भावना पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई कर अदालत में रिपोर्ट पेश की जाए। न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश गौतम शर्मा की ओर से दायर जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी रमेश सिनसिनवार अदालत में पेश हुए।
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राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता सुदेश सैनी ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने कई लोगों को रेलवे और एफसीआई में नौकरी लगाने के नाम पर छह-छह लाख रुपए की ठगी की है। इसके साथ ही कई लोगों को कोलकाता ले जाकर फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिए हैं। आरोपियों ने अलवर के अलवा अन्य स्थानों पर भी ऐसी ठगी की है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच में कई लागों से ठगी की बात साबित हुई है, लेकिन पीड़ित बयान देने सामने नहीं आ रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि पीड़ितों का सामने नहीं आने का तर्क उचित प्रतीत नहीं होता। ऐसा लगता है कि बहुत बड़ा गिरोह नौकरी के नाम पर बेरोजगारों को ठग रहा है। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एसओजी को जांच सौंप दी है।
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