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PM Modi और RSS से क्यों नाराज है शंकराचार्य निश्चलानंद

Sun, 16 Apr 2017 09:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sun, 16 Apr 2017 09:02 PM IST
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Shankaracharya comment on political leaders
शंकराचार्य जगदगुरू निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : amar ujala
गोवर्धनपीठपुरी शंकराचार्य जगदगुरू निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि देश के किसी भी दल के प्रधानमंत्री ने शंकराचार्यों का वर्चस्व कभी भी पसंद नहीं किया, इनमें वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हैं।
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शंकराचार्य निश्चलानंद अजमेर की सागर विहार कॉलोनी में लगे जिज्ञासा समाधान शिविर में लोगों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने यहां साफ—साफ कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री ने शंकराचार्यों की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं किया। सभी ने उन्हें मुट्ठी में रखकर राजपाट चलाने का काम किया। अब नरेन्द्र मोदी भी उनमें से ही एक हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब शंकराचार्यों के पास नागा सैनिक थे, जो धर्म की रक्षा का कार्य करते थे। इसके बाद खालसा पंथ ने यह जिम्मेदारी संभाली। फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गठन के बाद भी धर्म प्रचार की उम्मीदे बढ़ी, लेकिन अब यह भी केवल भारतीय जनता पार्टी का प्रचारक बनकर रह गया है।
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इससे पहले शनिवार को भी जगदगुरू निश्चलानंद सरस्वती ने देश की सीमा पर बलिदान होने वाले सैनिकों के प्रति चिंता प्रकट करते हुए नेताओं को कटघरे में खड़ा किया था।ब्रह्मचोक में आयोजित धर्मसभा मे उन्होंने सैनिकों के शहीद होने, राम मंदिर निर्माण, गौरक्षा आदि विषयों पर राजतंत्र की उदासीनता पर नाराजगी व्यक्त की थी। शंकराचार्य ने कहा कि देश के उच्च पद पर आसीन नेता स्वार्थ लोलुप हैं। देश के सैनिक आतंकवादियों के हाथों जान गंवा रहे हैं, उधर नेता वातानुकूलित कमरों में बैठकर शांति वार्ता कर सैनिकों के बलिदान पर पानी फेर रहे हैं।
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पुरी शंकराचार्य ने कहा था कि राजनीति में भी आजकल त्याग, तपोमय जीवन से मुक्त होकर राष्ट्रहित की भावना से काम करने वाले गिने—चुने ही व्यक्ति हैं। आज की राजनीति अराजक तत्वों की बपौती बनती जा रही है। शंकराचार्य ने अजमेर में भी धर्मसभा की थी।
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