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जयपुराइट्स के किचन को महका रहे हैं मेले के मसाले
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 15 May 2017 06:13 PM IST
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- फोटो : Internet
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नवजीवन उपहार बिक्री केन्द्र पर चल रहे सहकार मसाला मेले में अब तक जयपुर शहरवासियों ने 43 लाख रुपये से अधिक के मसालों की खरीद की। हर साल लगने वाला सहकार मसाला मेला अब गुलाबी नगर की एक पहचान बन चुका है।
मेले के मसालों से जयपुरराइट्स के किचन में लगने वाला तड़का और भी ज्यादा महकने लगा है। कॉनफैड प्रशासक डॉ. वीना प्रधान ने बताया कि बाजार भाव से काफी कम रेट पर मिलने वाले ये मसाले जनता के बीच काफी पसंद किए जा रहे हैं। इन मसालों की खास बात ये है कि यह एकदम शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले हैं। यह मेला सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक चलता है और इस बार मेले का आयोजन 19 मई तक किया जाएगा। मेले में सिहोर (मध्यप्रदेश) के गेहूं की भारी मांग उपभोक्ताओं की ओर से की जा रही है जिसे देखते हुए अब वहां से ज्यादा से ज्यादा गेहूं के कट्टे मंगवाए जा रहे हैं।
डॉ. प्रधान ने बताया कि मथानिया की मिर्ची की खरीद ज्यादा होने से जोधपुर सहकारी उपभोक्ता भंडार द्वारा मिर्ची की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। वहीं राजस्थान के बासमती चावल कहे जाने वाले कोटा-बूंदी के चावल के भी अतिरिक्त कट्टे मंगवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि शहरवासियों को किसी भी प्रकार के मसालों एवं अन्य सामग्री की कमी न हो इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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मेले के मसालों से जयपुरराइट्स के किचन में लगने वाला तड़का और भी ज्यादा महकने लगा है। कॉनफैड प्रशासक डॉ. वीना प्रधान ने बताया कि बाजार भाव से काफी कम रेट पर मिलने वाले ये मसाले जनता के बीच काफी पसंद किए जा रहे हैं। इन मसालों की खास बात ये है कि यह एकदम शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले हैं। यह मेला सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक चलता है और इस बार मेले का आयोजन 19 मई तक किया जाएगा। मेले में सिहोर (मध्यप्रदेश) के गेहूं की भारी मांग उपभोक्ताओं की ओर से की जा रही है जिसे देखते हुए अब वहां से ज्यादा से ज्यादा गेहूं के कट्टे मंगवाए जा रहे हैं।
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डॉ. प्रधान ने बताया कि मथानिया की मिर्ची की खरीद ज्यादा होने से जोधपुर सहकारी उपभोक्ता भंडार द्वारा मिर्ची की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। वहीं राजस्थान के बासमती चावल कहे जाने वाले कोटा-बूंदी के चावल के भी अतिरिक्त कट्टे मंगवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि शहरवासियों को किसी भी प्रकार के मसालों एवं अन्य सामग्री की कमी न हो इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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