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लोकायुक्त ने की पूर्व मंत्री बीना काक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश, जानिए पूरा मामला
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:01 PM IST
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bina kak
- फोटो : File
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पूर्व पर्यटन मंत्री बीना काक की सुख सुविधाओं पर हुए अनियमित खर्चें के मामले में लोकायुक्त ने उनके तथा राजस्थान पर्यटन विकास निगम के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और खर्च की गई राशि वसूलने की अनुशंसा राज्य सरकार से की है।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान के लोकायुक्त जस्टिस एसएस कोठारी ने राजस्थान पर्यटन विकास निगम आरटीडीसी में 32 लाख 73 हजार रुपए के अनियमित खर्चे पर तत्कालीन मंत्री बीना काक और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को सिफारिश भेजी है। कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को तीन महीने का वक्त दिया गया है। दरअसल, घाटे में चल रहे आरटीडीसी ने नियम कायदों को ताक में रखते हुए तत्कालीन पर्यटन मंत्री बीना काक के आवास पर टीवी, फ्रिज, एसी, वाहन और अन्य उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराई थी।
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जानकारी के अनुसार, राजस्थान के लोकायुक्त जस्टिस एसएस कोठारी ने राजस्थान पर्यटन विकास निगम आरटीडीसी में 32 लाख 73 हजार रुपए के अनियमित खर्चे पर तत्कालीन मंत्री बीना काक और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को सिफारिश भेजी है। कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को तीन महीने का वक्त दिया गया है। दरअसल, घाटे में चल रहे आरटीडीसी ने नियम कायदों को ताक में रखते हुए तत्कालीन पर्यटन मंत्री बीना काक के आवास पर टीवी, फ्रिज, एसी, वाहन और अन्य उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराई थी।
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ये भी पाए गए थे दोषी
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भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा परीक्षण विभाग की 29 मार्च 2012 को जारी रिपोर्ट में पर्यटन मंत्री को कार, फर्नीचर, माईक्रोवेव ऑवन, टीवी, टाटा स्काई डीटीएच, वाटर कूलर, एसी एवं कम्प्यूटर आदि के रूप में कुल 32 लाख 73 हजार रुपए की सुविधाएं पहुंचाने का उल्लेख किया गया था।
यह मामला अप्रैल 2012 में उछला तो लोकायुक्त की ओर से स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जांच की गई। जिसमें तत्कालीन पर्यटन मंत्री बीना काक, पर्यटन विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राकेश श्रीवास्तव, पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक उषा शर्मा, तत्कालीन प्रबन्ध निदेशक मंजीत सिंह, पर्यटन विभाग के तत्कालीन संयुक्त शासन सचिव चन्द्रशेखर मूथा, पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के तत्कालीन प्रबन्ध निदेशक विनोद अजमेरा एवं पर्यटन विभाग के तत्कालीन वित्तीय सलाहकार आलोक माथुर को दोषी पाया।
यह मामला अप्रैल 2012 में उछला तो लोकायुक्त की ओर से स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जांच की गई। जिसमें तत्कालीन पर्यटन मंत्री बीना काक, पर्यटन विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राकेश श्रीवास्तव, पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक उषा शर्मा, तत्कालीन प्रबन्ध निदेशक मंजीत सिंह, पर्यटन विभाग के तत्कालीन संयुक्त शासन सचिव चन्द्रशेखर मूथा, पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के तत्कालीन प्रबन्ध निदेशक विनोद अजमेरा एवं पर्यटन विभाग के तत्कालीन वित्तीय सलाहकार आलोक माथुर को दोषी पाया।