Rajashan News: जालोर में दलित छात्र की पिटाई के बाद मौत पर सियासी बवाल, आखिर क्यों हो रही है राजनीति हावी
राजस्थान के जालोर में दलित छात्र की पिटाई के बाद मौत ने अब सियासी रूप ले लिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही अपने वोटबैंक की चिंता है और इस समय दोनों ही एक-दूसरे के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश में जुट गए हैं।
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जालोर में दलित छात्र ने पानी की मटकी को छू लिया तो उसकी पिटाई हो गई। उसके कान में समस्या थी और पिटाई से उसकी हालत खराब हो गई और इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई। इसका दूसरा पहलू यह भी सामने आया कि बच्चे की पिटाई पानी के मटके को छूने की वजह से नहीं बल्कि दो छात्रों की आपसी मारपीट को लेकर हुई थी। इस बीच, दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए सक्रिय हो गई हैं।
मंगलवार को कांग्रेस के कई बड़े नेता जालोर के सुराणा पहुंचे। प्रियंका गांधी भी जा सकती हैं। जब बच्चे का इलाज चल रहा था तब तो कोई गया नहीं, अब उसकी मौत पर सभी बड़े नेताओं की सुराणा दौड़ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ कांग्रेस नेताओं ने तो अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए और मुआवजा व नौकरियों की मांग कर डाली। भाजपा नेता डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने जालोर कूच का ऐलान किया तो भाजपा के नेता भी आपस में भिड़ गए।
मारवाड़ में वोटबैंक बचाने की जुगत
दरअसल, इस मसले ने पुराने वर्ग संघर्ष को जीवित कर दिया है। मारवाड़ में 30 से अधिक विधानसभा सीट है और इस इलाके में लगभग 38 % दलित वोटर है और 22% राजपूत वोटर हैं। मुसलमानों की आबादी भी 18% के आसपास है। राजपूत और दलित भाजपा के कोर वोटर है। यदि दलित वोटर इस मुद्दे पर छिटके तो भाजपा को नुकसान और कांग्रेस का बड़ा लाभ होगा। यह वोटर मूल रूप से लंबे अरसे से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, इस वजह से कांग्रेस इस वर्ग को फिर अपने खेमे में लाना चाहती है। कांग्रेस के नेताओं की आपसी बयानबाजी में पार्टी को दलित पॉकेट्स में जगह बनाने में मदद की है।
भाजपा इस मुद्दे को भुनाने में नाकाम
भाजपा की प्रदेश इकाई इस मसले पर लाभ उठाने में कामयाब नहीं हो सकी है। कांग्रेस तकरार के बाद भी एकजुट दिख रही है। भाजपा समय पर किरोड़ीलाल मीणा को समर्थन देती तो भाजपा इसका लाभ उठा सकती थी। कांग्रेस नेताओं ने मांग की, जिसे उनकी ही सरकार ने मान भी लिया। इससे दलित समाज की संवेदनाओं और सहानुभूति को कांग्रेस ने हासिल कर लिया। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी न्याय, मुआवजा की बात कर भाजपा से यह मुद्दा एक तरह से छिन ही लिया है। कुल 40 लाख रुपये के आसपास का मुआवजा बंटा है।