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राजस्थान: प्रेम और समर्पण के प्रतीक प्रवासी क्रेन पक्षियों पर रोग का कहर, बर्ड फ्लू की आशंका, 200 की मौत

Sun, 14 Nov 2021 09:07 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 14 Nov 2021 09:07 PM IST
सार

रविवार को जोधपुर जिले के रामासनी के एक अन्य तालाब पर तीन और क्रेन की मौत हो गई। पिछले 10 दिनों में करीब 200  क्रेन की मौत हो गई है।  

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Rajasthan: Symbol of love and dedication, disease havoc on migratory crane birds, fear of bird flu, 200 killed
क्रेन पक्षी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रेम और विरह के लोक गीतों के प्रतीक प्रवासी पक्षी कुरजां या क्रेन पर राजस्थान में इन दिनों रोग का कहर टूट पड़ा है। जोधपुर जिले में पिछले करीब दस दिनों में लगभग 200 कुरजां की मौत हो चुकी है। माना जा रहा है कि इनकी बर्ड फ्लू या रानीखेत बीमारी से मौत हो रही है। मुर्गियों की बर्ड फ्लू की जांच की जा रही है। 

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जोधपुर के उप वन संरक्षक रमेश कुमार मालपानी ने बताया कि रविवार को जिले के रामासनी के एक अन्य तालाब पर तीन और क्रेन की मौत हो गई। पिछले 10 दिनों में करीब 200  क्रेन की मौत हो गई है।  
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पाया जा रहा है तेजी से काबू
हालांकि बीमारी को रोकने में तेजी से कामयाबी भी मिल रही है। शुरू में इससे ज्यादा पक्षियों की मौत हुई थी, जबकि अब मरने वाले पक्षियों की संख्या घट रही हैं। शनिवार को मरने के सात मामले सामने आए जबकि रविवार को केवल तीन क्रेन की मौत हुई। कापरड़ा, रामासनी, ओलवी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 15 हजार क्रेन ने डेरा डाल रखा है।
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बर्ड फ्लू या रानीखेत रोग की आशंका
वरिष्ठ पशु चिकित्सक श्रवण सिंह राठौर ने कहा कि लगभग 100 बीमार पक्षियों का इलाज किया जा रहा है और प्रथम दृष्टया वे रानीखेत रोग से संक्रमित हैं। कापरड़ा गांव के सेज हाईवे स्थित तालाब पर हजारों किलोमीटर का सफर तय कर शीतकालीन प्रवास पर आई सैकड़ों क्रेन का बिलाड़ा में बनाए गए अस्थाई बचाव केंद्र में इलाज किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मृत पक्षियों का विसरा जांच के लिए भोपाल भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि इनकी मौत बर्ड फ्लू, रानीखेत या अन्य किसी रोग से हुई है। 


एक बार बनाते हैं जोड़ा
क्रेन पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। ये जीवन में एक बार जोड़ा बनाने वाले पक्षी साथी की मौत पर खाना-पीना बंद कर देते हैं, जिससे प्राय: दूसरे की भी मौत हो जाती है।

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