{"_id":"5a658a8a4f1c1ba0268b5bf2","slug":"rajasthan-pil-filed-on-weak-fire-campaign-court-issued-notice","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कमजोर फायर बिग्रेड सिस्टम को लेकर जनहित याचिका दायर, कोर्ट ने सरकार और निगम को दिए नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमजोर फायर बिग्रेड सिस्टम को लेकर जनहित याचिका दायर, कोर्ट ने सरकार और निगम को दिए नोटिस
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:30 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : amar ujala
जयपुर के विद्याधर नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद आज प्रदेश में कमजोर फायर बिग्रेड सिस्टम को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार व निगम को नोटिस जारी किए हैं।
अधिवक्ता कुणाल रावत की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में पर्याप्त फायर बिग्रेड सिस्टम नहीं है। इसके अलावा फायर केन्द्रों के पास पर्याप्त उपकरण नहीं है। नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार 40 हजार की जनसंख्या पर एक फायर बिग्रेड वाहन होना चाहिए। जबकि शहर में 11 केन्द्रों पर केवल पचास वाहन ही हैं।
इसके अलावा प्रदेश के 52 शहर-कस्बे ऐसे हैं जहां फायर बिग्रेड केन्द्र तो दूर एक फायर बिग्रेड वाहन तक नहीं है।
विज्ञापन
अधिवक्ता कुणाल रावत की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में पर्याप्त फायर बिग्रेड सिस्टम नहीं है। इसके अलावा फायर केन्द्रों के पास पर्याप्त उपकरण नहीं है। नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार 40 हजार की जनसंख्या पर एक फायर बिग्रेड वाहन होना चाहिए। जबकि शहर में 11 केन्द्रों पर केवल पचास वाहन ही हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा प्रदेश के 52 शहर-कस्बे ऐसे हैं जहां फायर बिग्रेड केन्द्र तो दूर एक फायर बिग्रेड वाहन तक नहीं है।
Trending Videos
तीन सप्ताह में जबाव पेश करें
court
याचिका में हाल ही में विद्याधर नगर में हुए हादसे का उदाहरण देने के हुए कहा गया कि फायरकर्मियों को सेना की तरह मुस्तैद होना चाहिए, लेकिन आग लगने पर कर्मचारी बिना संसाधन काफी देरी से पहुंचे। जिसके चलते पांच लोगों की मौत हो गई। याचिका में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव, कलक्टर और नगर निगम आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने 3 सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने दिए हैं।