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राजस्थान हाउस: हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद से हटाया बैन
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 03 Jul 2017 06:59 PM IST
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फाइल फोटो
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राजस्थान हाईकोर्ट में आज राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र पेश कर बताया गया कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्रसिंह और पूर्व सांसद महेश जोशी ने राजस्थान हाउस का लाखों रुपए का बकाया जमा करा दिया है। सरकार की ओर से पेश शपथ पत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई 11 दिसंबर को तय की है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर केबी अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पूर्व जनप्रतिनिधियों ने बकाया जमा करा दिया है। ऐसे में याचिका को निस्तारित किया जाए। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे अभी तक तय नहीं हुए हैं। राज्य सरकार को बकायादारों से ब्याज भी वसूलना चाहिए।
इसके अलावा भविष्य में बकाया वसूली के लिए नीति बनाने के संबंध में भी कुछ नहीं किया गया। याचिका में यह भी गुहार की गई है कि चुनाव आयोग चुनाव के समय केवल संसद के बकाया की जानकारी ही नहीं ले, बल्कि केन्द्र और राज्य सरकार के समस्त बकाया राशि की जानकारी भी मांगनी चाहिए।
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ऐसे में इन मुद्दों के अभी तक तय नहीं होने के कारण याचिका को निस्तारित नहीं किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिका पर 11 दिसंबर तक सुनवाई टाल दी है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर केबी अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पूर्व जनप्रतिनिधियों ने बकाया जमा करा दिया है। ऐसे में याचिका को निस्तारित किया जाए। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे अभी तक तय नहीं हुए हैं। राज्य सरकार को बकायादारों से ब्याज भी वसूलना चाहिए।
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इसके अलावा भविष्य में बकाया वसूली के लिए नीति बनाने के संबंध में भी कुछ नहीं किया गया। याचिका में यह भी गुहार की गई है कि चुनाव आयोग चुनाव के समय केवल संसद के बकाया की जानकारी ही नहीं ले, बल्कि केन्द्र और राज्य सरकार के समस्त बकाया राशि की जानकारी भी मांगनी चाहिए।
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ऐसे में इन मुद्दों के अभी तक तय नहीं होने के कारण याचिका को निस्तारित नहीं किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिका पर 11 दिसंबर तक सुनवाई टाल दी है।