{"_id":"5a6f30934f1c1b9f268b70d1","slug":"rajasthan-highcourt-comment-at-jaipur-smart-city","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विदेशी कहते हैं कि यहां आदमी सुरक्षित नहीं, इससे बड़ी बदनामी क्या होगीः राजस्थान हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी कहते हैं कि यहां आदमी सुरक्षित नहीं, इससे बड़ी बदनामी क्या होगीः राजस्थान हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 29 Jan 2018 08:05 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जेएलएन मार्ग सहित शहर के वीआईपी इलाकों में बार-बार रोड बनाई जाती है, लेकिन कॉलोनियों की सड़कों का कोई ध्यान ही नहीं है। फिर किस स्मार्ट सिटी की बात की जाती है।
अदालत ने कहा कि विदेशी आकर कहते हैं कि यहां आदमी सुरक्षित नहीं है। देश के लिए इससे बड़ी बदनामी क्या होगी, इसकी चिंता किसी को नहीं है। शहर में आदमी अपनी रिस्क पर घर से बाहर निकल रहा है। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी शहर में सांड से हुई विदेशी युवक की मौत के बाद लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए की। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में नगर निगम और जेडीए के विभिन्न जोन के अधिकारी अदालत में पेश हुए।
जेडीए की ओर से शपथ पत्र पेश कर अदालत को बताया गया कि सभी एजेन्सी को केबल से हुए गड्ढों को खुला नहीं छोड़ने के लिए पाबंद कर दिया गया है। वहीं, निगम की ओर से माना गया कि शहर में आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं।
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निगम ने बताया कि गत छह माह में 6 हजार 800 आवारा पशुओं को पकड़ा गया है। इसके अलावा स्वच्छता पर भी व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इस पर अदालत ने संतुष्टता जाहिर करते हुए कहा कि बाकि मुद्दों पर कोई काम नहीं हो रहा है।
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अदालत ने कहा कि विदेशी आकर कहते हैं कि यहां आदमी सुरक्षित नहीं है। देश के लिए इससे बड़ी बदनामी क्या होगी, इसकी चिंता किसी को नहीं है। शहर में आदमी अपनी रिस्क पर घर से बाहर निकल रहा है। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी शहर में सांड से हुई विदेशी युवक की मौत के बाद लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए की। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में नगर निगम और जेडीए के विभिन्न जोन के अधिकारी अदालत में पेश हुए।
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जेडीए की ओर से शपथ पत्र पेश कर अदालत को बताया गया कि सभी एजेन्सी को केबल से हुए गड्ढों को खुला नहीं छोड़ने के लिए पाबंद कर दिया गया है। वहीं, निगम की ओर से माना गया कि शहर में आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं।
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निगम ने बताया कि गत छह माह में 6 हजार 800 आवारा पशुओं को पकड़ा गया है। इसके अलावा स्वच्छता पर भी व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इस पर अदालत ने संतुष्टता जाहिर करते हुए कहा कि बाकि मुद्दों पर कोई काम नहीं हो रहा है।
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टोल वसूलने के बावजूद टूटी सड़कें
अदालत ने कहा कि अधिकतर दुर्घटनाएं गड्ढों और आवारा पशुओं के चक्कर में होती हैं, लेकिन इसकी जिम्मेदारी नहीं ली जाती। क्योंकि अगर जिम्मेदारी ली तो मुआवजा देना होगा। अदालत ने कहा कि अफसर तो मानते हैं कि वो रोड ही क्या, जिस पर गड्ढे नहीं हों। आवारा पशुओं को पकड़ने में भी भ्रष्टाचार हो रहा है।
अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि जयपुर-दिल्ली हाईवे का निर्माण 2011 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन दो गुणा से अधिक टोल वसूलने के बावजूद भी जनता को टूटी सड़कें ही मिल रही हैं। पृथ्वीराज नगर के विकास को लेकर दिए आदेश की पालना भी अब तक नहीं हुई है। इसके साथ ही अदालत ने अफसरों की ओर से पेश शपथ पत्रों की कॉपी न्यायमित्र को देने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि जयपुर-दिल्ली हाईवे का निर्माण 2011 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन दो गुणा से अधिक टोल वसूलने के बावजूद भी जनता को टूटी सड़कें ही मिल रही हैं। पृथ्वीराज नगर के विकास को लेकर दिए आदेश की पालना भी अब तक नहीं हुई है। इसके साथ ही अदालत ने अफसरों की ओर से पेश शपथ पत्रों की कॉपी न्यायमित्र को देने के आदेश दिए हैं।