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उपचुनावः इस समाज को खुश करने के लिए सरकार ने फिर खेला पुराना दांव
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:11 AM IST
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किरोड़ी सिंह बैंसला
चुनावी राजनीति के दौरान जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए सरकारें सभी तरह के पैंतरे अपनाती हैं।
ऐसा ही कुछ राजस्थान विधानसभा में भी देखने को मिला। जब सरकार ने गुर्जरों आरक्षण के लिए ऐसा बिल सदन में रखा, जिसके कोर्ट में फंसने के पूरे आसार हैं। गौरतलब है कि आगामी दिनों में राजस्थान में तीन उपचुनाव होने हैं, जिसमें अजमेर लोकसभा की सीट भी शामिल है।
इस सीट से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट लोकसभा चुनाव हार चुके हैं, जबकि वर्ष 2009 का चुनाव वे इस सीट से जीते थे। अजमेर लोकसभा क्षेत्र गुर्जर बाहुल्य माना जाता है, इसलिए विधानसभा में आए बिल को उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब राजस्थान सरकार गुर्जर सहित पांच अन्य जातियों को अलग से आरक्षण देने के लिए विधानसभा में नया बिल लेकर आई है। इस बिल पर चर्चा आज होगी।
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ऐसा ही कुछ राजस्थान विधानसभा में भी देखने को मिला। जब सरकार ने गुर्जरों आरक्षण के लिए ऐसा बिल सदन में रखा, जिसके कोर्ट में फंसने के पूरे आसार हैं। गौरतलब है कि आगामी दिनों में राजस्थान में तीन उपचुनाव होने हैं, जिसमें अजमेर लोकसभा की सीट भी शामिल है।
इस सीट से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट लोकसभा चुनाव हार चुके हैं, जबकि वर्ष 2009 का चुनाव वे इस सीट से जीते थे। अजमेर लोकसभा क्षेत्र गुर्जर बाहुल्य माना जाता है, इसलिए विधानसभा में आए बिल को उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
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अब राजस्थान सरकार गुर्जर सहित पांच अन्य जातियों को अलग से आरक्षण देने के लिए विधानसभा में नया बिल लेकर आई है। इस बिल पर चर्चा आज होगी।
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कोर्ट में चुनौती मिलने की पूरी सम्भावना
राजस्थान विधानसभा
आरक्षण का मुद्दा हमेशा से ही सरकारों के लिए राजनीतिक रोटियां सेंकने वाला रहा है। ऐसा ही कुछ बीते कई वर्षों से राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है। यहां का गुर्जर समाज बीते करीब आठ वर्षों से आरक्षण की मांग कर रहा है।
अब नया बिल यदि लागू होता है तो राज्य में ओबीसी कोटा 21 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो जाएगा। सरकार की मंशा है वर्तमान ओबीसी कोटे को दो भागों में बांटकर पांच जातियों को आरक्षण दिया जाए।
वहीं कुल आरक्षण 50 फीसदी से बढ़कर 54 फीसदी हो जाएगा। ऐसे में फिर से इस आरक्षण बिल को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और चौथी बार यह बिल फंस सकता है।
अब नया बिल यदि लागू होता है तो राज्य में ओबीसी कोटा 21 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो जाएगा। सरकार की मंशा है वर्तमान ओबीसी कोटे को दो भागों में बांटकर पांच जातियों को आरक्षण दिया जाए।
वहीं कुल आरक्षण 50 फीसदी से बढ़कर 54 फीसदी हो जाएगा। ऐसे में फिर से इस आरक्षण बिल को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और चौथी बार यह बिल फंस सकता है।