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आईएएस सिंघवी को प्रमोशन का तोहफा, महाघूस कांड में हुए थे सस्पेंड
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 14 Oct 2017 07:09 PM IST
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राजस्थान सचिवालय
- फोटो : file photo
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राजस्थान सरकार ने जिस आईएएस अफसर को चर्चित खान महाघूस कांड में सस्पेंड किया था, उन्हें अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर प्रमोशन दिया है।
राज्य सरकार ने आज एक आदेश जारी कर दो आईएएस अधिकारियों की पदस्थापना की है। इनमें आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे अशोक सिंघवी को इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में महानिदेशक पद पर नियुक्ति दी गई है। जबकि एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी उमेश कुमार को राजस्थान रोडवेज का अध्यक्ष बनाया गया है।
आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी राजस्थान के खान विभाग के चर्चित महाघूस कांड में आरोपी है। दो साल के निलंबन के बाद सरकार ने उन्हें पिछले महीने ही बहाल किया था। तब से वे पदस्थापना के आदेशों का इंतजार कर रहे थे।
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राज्य सरकार ने आज एक आदेश जारी कर दो आईएएस अधिकारियों की पदस्थापना की है। इनमें आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे अशोक सिंघवी को इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में महानिदेशक पद पर नियुक्ति दी गई है। जबकि एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी उमेश कुमार को राजस्थान रोडवेज का अध्यक्ष बनाया गया है।
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आईएएस अधिकारी अशोक सिंघवी राजस्थान के खान विभाग के चर्चित महाघूस कांड में आरोपी है। दो साल के निलंबन के बाद सरकार ने उन्हें पिछले महीने ही बहाल किया था। तब से वे पदस्थापना के आदेशों का इंतजार कर रहे थे।
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आठ महीने जेल में रह चुके हैं सिंघवी
अशोक सिंघवी
- फोटो : file photo
खान विभाग में उजागर हुए महाघूस कांड में अशोक सिंघवी की लिप्तता को देखते हुए उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 17 नवंबर 2015 को उन्हें निलंबित कर दिया था। अशोक सिंघवी करीब आठ महीने तक जेल में रहे। पिछले महीने उन्हें बहाल कर दिया था।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने चित्तौड़गढ में शेरखान की छह खानों को बंद करावा दिया था। इन खानों को चालू करने के लिए खान विभाग के अधिकारियों ने 2.55 करोड़ रुपए की घूस मांगी थी। उस समय अशोक सिंघवी विभाग के प्रमुख सचिव पद पर थे। एसीबी के सामने घूस लेकर खानों को चालू करने की जानकारी आई तो उसने जाल बिछाकर आईएएस अशोक सिंघवी समेत आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उसके बाद जांच की तो बंद पड़ी खानों को चालू करने के एवज में लगभग 22 करोड़ की डील का पता चला।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने चित्तौड़गढ में शेरखान की छह खानों को बंद करावा दिया था। इन खानों को चालू करने के लिए खान विभाग के अधिकारियों ने 2.55 करोड़ रुपए की घूस मांगी थी। उस समय अशोक सिंघवी विभाग के प्रमुख सचिव पद पर थे। एसीबी के सामने घूस लेकर खानों को चालू करने की जानकारी आई तो उसने जाल बिछाकर आईएएस अशोक सिंघवी समेत आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उसके बाद जांच की तो बंद पड़ी खानों को चालू करने के एवज में लगभग 22 करोड़ की डील का पता चला।