जातिगत जनगणना पर बोले गहलोत- प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण; 'पिछड़ा वर्ग' शब्द तक शामिल नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताया है। उन्होंने ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द शामिल नहीं होने पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया बदलने की मांग की।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी तथा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र का हवाला देते हुए इसे त्रुटिपूर्ण करार दिया है। गहलोत ने आरोप लगाया कि जातियों की जानकारी जुटाने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया खामी भरी है और इससे जातियों के वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे।
गहलोत ने कहा कि सरकार ने जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ‘मुक्त प्रश्न’ का तरीका चुना है। इसमें व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। उनका कहना है कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। ऐसे में एक ही जाति के कई नाम दर्ज होने से आंकड़े बिखर जाएंगे और उनका सही विश्लेषण मुश्किल होगा।
‘पिछड़ा वर्ग’ की आबादी का सही आंकड़ा नहीं आएगा
गहलोत ने पत्र में कहा कि मौजूदा प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं है। ऐसे में पिछड़े वर्ग की वास्तविक आबादी का पता लगाने में दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब आंकड़े स्पष्ट और विश्वसनीय तरीके से जुटाए जाएं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मांग की कि जातियों की जानकारी दर्ज करने से पहले उनकी एक सूची तैयार की जाए। उन्होंने इसके लिए तेलंगाना के 2024 और बिहार के 2022 के जाति सर्वेक्षण का उदाहरण दिया।
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राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा की मांग
गहलोत ने केंद्र सरकार से मौजूदा प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत कर नई प्रश्नावली तैयार करनी चाहिए, ताकि जाति जनगणना के आंकड़े सटीक और उपयोगी साबित हो सकें।
गहलोत ने आरोप लगाया कि जाति जनगणना की घोषणा के समय सभी ने इसका स्वागत किया था, लेकिन अब जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उससे इसके मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सही आंकड़े सामने आने के लिए प्रक्रिया में स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है।