{"_id":"59ee33cd4f1c1b74698b727e","slug":"rajasthan-government-on-back-foot-reconsider-controversial-bill","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बैकफुट पर वसुंधरा सरकार, जनप्रतिनिधियों-लोकसेवकों के 'रखवाले' बिल पर होगा पुनर्विचार! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैकफुट पर वसुंधरा सरकार, जनप्रतिनिधियों-लोकसेवकों के 'रखवाले' बिल पर होगा पुनर्विचार!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:54 AM IST
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rajasthan vidhan sabha, jaipur
- फोटो : File
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जनप्रतिनिधियों और लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेने संबंधी बिल राजस्थान विधानसभा में पेश हुआ। इसको लेकर देशभर में राज्य सरकार की किरकिरी हुई। जिसके बाद सरकार बैकफुट पर आती नजर आ रही है।
राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017' पेश किया गया। इस बिल का जमकर विरोध हो रहा हैं। इसे देखते हुए देर रात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने आवास पर प्रमुख मंत्रियों और कुछ अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में इस बिल के विरोध से निपटने की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में इस बिल पर पुनर्विचार करने को लेकर एक राय बनी। मंत्रियों ने कहा कि कुछ समय बाद अजमेर और अलवर में उपचुनाव है और अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में इस बिल को लेकर विवाद सरकार के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने इस विवाद को दूर करने के लिए ये बिल प्रवर समिति को सौंपने का सुझाव दिया। इसकी घोषणा विधानसभा में मंगलवार को की जा सकती है। बैठक में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़, पीडब्लूडी मंत्री यूनुस खान व अभाव अभियोग मंत्री अरुण चतुर्वेदी शामिल हुए।
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राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017' पेश किया गया। इस बिल का जमकर विरोध हो रहा हैं। इसे देखते हुए देर रात मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने आवास पर प्रमुख मंत्रियों और कुछ अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में इस बिल के विरोध से निपटने की रणनीति पर विचार विमर्श किया गया।
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मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में इस बिल पर पुनर्विचार करने को लेकर एक राय बनी। मंत्रियों ने कहा कि कुछ समय बाद अजमेर और अलवर में उपचुनाव है और अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में इस बिल को लेकर विवाद सरकार के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने इस विवाद को दूर करने के लिए ये बिल प्रवर समिति को सौंपने का सुझाव दिया। इसकी घोषणा विधानसभा में मंगलवार को की जा सकती है। बैठक में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़, पीडब्लूडी मंत्री यूनुस खान व अभाव अभियोग मंत्री अरुण चतुर्वेदी शामिल हुए।
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इस तरह दबाव में आई सरकार
सीएम वसुंधरा राजे
- फोटो : amar ujala
राजस्थान में दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश-2017 का मसौदा तैयार होने के साथ ही विरोध शुरू हो गया। इस बिल को मीडिया की आजादी छीनने वाला और भ्रष्ट अफसरों एवं जनप्रतिनिधियों को संरक्षण देने वाला बताते हुए विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथ लिया।
आज जब विधानसभा की कार्रवाई हुई तो इस बिल के विरोध में कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया और इस हंगामे के बीच ये बिल पेश हुआ। इसके बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी। कांग्रेस ने इसके विरोध में सदन के बाहर गिरफ्तारियां दी और प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले में वसुंधरा सरकार की किरकिरी हो रही है।
यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी मौखिक तौर पर इस बिल को निकम्मों को बचाने वाला बताया। सोशल मीडिया पर भी इस बिल को लेकर राज्य सरकार ट्रोल हो रही है। चौतरफा घिरने के बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार का मानस बनाया है।
आज जब विधानसभा की कार्रवाई हुई तो इस बिल के विरोध में कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया और इस हंगामे के बीच ये बिल पेश हुआ। इसके बाद सदन की कार्रवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी। कांग्रेस ने इसके विरोध में सदन के बाहर गिरफ्तारियां दी और प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले में वसुंधरा सरकार की किरकिरी हो रही है।
यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी मौखिक तौर पर इस बिल को निकम्मों को बचाने वाला बताया। सोशल मीडिया पर भी इस बिल को लेकर राज्य सरकार ट्रोल हो रही है। चौतरफा घिरने के बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार का मानस बनाया है।