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राजस्थान उपचुनाव: जीत के बावजूद बढ़ सकता है राहुल गांधी का 'सिरदर्द'
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 01 Feb 2018 03:41 PM IST
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कांग्रेस
राजस्थान उपचुनावों में कांग्रेस को मिली जीत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए सिरदर्द खड़ा कर सकती है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह जीत युवा प्रदेशाध्यक्ष के जोश का असर है या अनुभवी नेता की रणनीति का।
राजस्थान में चार साल से प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के लिए ये चुनाव अहम माने जा रहे थे। इधर, राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे और दिग्गज नेता अशोक गहलोत भी यहां कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए इन उपचुनावों को दोनों पार्टियों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। उपचुनाव में कांग्रेस बखूबी लड़ी और सफलता भी प्राप्त की।
अंदरूनी राजनीति की बात करें तो राजस्थान में कांग्रेस पायलट गुट और गहलोत गुट में बंटी हुई है। अब जीत के श्रेय को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने घमासान चल रहा है। ऐसे में देखना ये है कि उपचुनाव में मिली जीत का सेहरा सचिन के सिर बंधेगा या गहलोत के सिर। इन उपचुनावों को देखते हुए ये भी माना जा रहा है कि इन दोनों बड़े नेताओं में जिसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा, अगले चुनाव में पार्टी की ओर से राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा भी वही बनेगा।
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हालांकि, इसका फैसला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को करना होगा, जो उनके लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
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राजस्थान में चार साल से प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के लिए ये चुनाव अहम माने जा रहे थे। इधर, राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे और दिग्गज नेता अशोक गहलोत भी यहां कांग्रेस का बड़ा चेहरा हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए इन उपचुनावों को दोनों पार्टियों के लिए सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। उपचुनाव में कांग्रेस बखूबी लड़ी और सफलता भी प्राप्त की।
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अंदरूनी राजनीति की बात करें तो राजस्थान में कांग्रेस पायलट गुट और गहलोत गुट में बंटी हुई है। अब जीत के श्रेय को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने घमासान चल रहा है। ऐसे में देखना ये है कि उपचुनाव में मिली जीत का सेहरा सचिन के सिर बंधेगा या गहलोत के सिर। इन उपचुनावों को देखते हुए ये भी माना जा रहा है कि इन दोनों बड़े नेताओं में जिसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा, अगले चुनाव में पार्टी की ओर से राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा भी वही बनेगा।
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हालांकि, इसका फैसला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को करना होगा, जो उनके लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
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गहलोत ने जुटाया पुराने दिग्गजों को
डेमो पिक
- फोटो : अमर उजाला
सचिन ने इन उपचुनावों के दौरान पूरे प्रचार की कमान सम्भाली और गहलोत ने भी कंधे से कंधा मिलाया। मौजूदा हालात में राजस्थान से लोकसभा में कांग्रेस का कोई सदस्य नहीं है, वहीं 200 सीट वाली विधानसभा में विपक्ष की गिनती मात्र 23 पर ही समाप्त हो जाती है।
दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत गुजरात चुनावों में अपना असर दिखा चुके हैं। वहां पूरी रणनीति गहलोत की चली। सफलता हासिल हुई तो कांग्रेस आलाकमान को अनुभवी नेता पर विश्वास और भी जमा। यही कारण है कि राजस्थान के इन उपचुनावों के ठीक पहले गहलोत खुलकर सामने आए। उनके साथ पुराने कांग्रेसी दिग्गज भी मैदान में दिखाई दिए।
इस बीच गहलोत ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा भी कि प्रदेशाध्यक्ष बनते ही मुख्यमंत्री के सपने देखते हैं। मीडिया वाले सपने दिखा देते हैं। मैंने कभी ऐसा नहीं किया तो सीएम बन गया।
दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत गुजरात चुनावों में अपना असर दिखा चुके हैं। वहां पूरी रणनीति गहलोत की चली। सफलता हासिल हुई तो कांग्रेस आलाकमान को अनुभवी नेता पर विश्वास और भी जमा। यही कारण है कि राजस्थान के इन उपचुनावों के ठीक पहले गहलोत खुलकर सामने आए। उनके साथ पुराने कांग्रेसी दिग्गज भी मैदान में दिखाई दिए।
इस बीच गहलोत ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा भी कि प्रदेशाध्यक्ष बनते ही मुख्यमंत्री के सपने देखते हैं। मीडिया वाले सपने दिखा देते हैं। मैंने कभी ऐसा नहीं किया तो सीएम बन गया।
आए एक ही मंच पर
राहुल गांधी
गौरतलब है कि पायलट और गहलोत के बीच चल रही आपसी खींचतान जगजाहिर रह चुकी है। हांलाकि इन चुनावों के दौरान दोनों एक मंच पर भी नजर आए। अब उपचुनाव में जीत को लेकर राजनीतिक विशलेषक और कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता यह तय करने के लिए बहस में जुट गए हैं कि यहां गहलोत का जादू चला है या फिर पायलट के जोश ने काम किया है।