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NH क्रॉस करके दूसरे इलाके में गया Tiger, बढ़ी चिंता कहीं-गाड़ी के नीचे ना आ जाए
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 29 Jan 2018 04:07 PM IST
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टाइगर टी 91
एक बाघ के नेशनल हाईवे के आसपास इलाके में मूवमेंट ने चिंता बढ़ा दी है और बाघ पर हरपल मौत का खतरा मंडरा रहा है। मामला बूंदी जिले का है जहां बाघ टी-91 राष्ट्रीय राजमार्ग -52 को क्रॉस कर कालदां के जंगलों में पहुंच गया।
बाघ के ताजा पगमार्क रविवार को कालन्दा के जंगल में वन विभाग की टीम को मिले हैं। बाघ अभी तक रामगढ़ विषधारी अभयारण्य के जंगलों में ही घूम रहा था। बाघ के राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर कालन्दा के जंगलों में पहुंचने के बाद वन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। रेंजर विष्णु गुप्ता ने बताया कि कलन्दा के जंगल में पगमार्क मिलने के बाद वनकर्मी लगातार बाघ की ट्रेकिंग करने में लगे हुए है।
जानकार सूत्रों ने बताया कि बाघ के कालदां के जंगलों में पहुंचने पर सुरक्षा बढ़ानी होगी। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वीसिंह राजावत ने बताया कि इस जंगल में सुरक्षा बढ़ाने को लेकर पहले भी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि जंगल में सुरक्षा इंतजाम को लेकर चिंता हो रही है। वन विभाग को इस पर ध्यान देना होगा।
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बाघ के ताजा पगमार्क रविवार को कालन्दा के जंगल में वन विभाग की टीम को मिले हैं। बाघ अभी तक रामगढ़ विषधारी अभयारण्य के जंगलों में ही घूम रहा था। बाघ के राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर कालन्दा के जंगलों में पहुंचने के बाद वन विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। रेंजर विष्णु गुप्ता ने बताया कि कलन्दा के जंगल में पगमार्क मिलने के बाद वनकर्मी लगातार बाघ की ट्रेकिंग करने में लगे हुए है।
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जानकार सूत्रों ने बताया कि बाघ के कालदां के जंगलों में पहुंचने पर सुरक्षा बढ़ानी होगी। पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वीसिंह राजावत ने बताया कि इस जंगल में सुरक्षा बढ़ाने को लेकर पहले भी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि जंगल में सुरक्षा इंतजाम को लेकर चिंता हो रही है। वन विभाग को इस पर ध्यान देना होगा।
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मुकंदरा रिजर्व में शिफ्ट किया जाना था टी-91
mukundra tiger reserve
बाघ के पगमार्क पहली बार 10 नवम्बर को तलवास के जंगलों में बांसी के निकट मिले थे। बाघ रणथम्भौर से निकलकर क्वांलजी के रास्ते से तलवास के जंगलों में पहुंचा था। बाद में वन विभाग के अधिकारियों ने उसके रणथम्भौर के टी-91 के रूप में पहचान की। तभी से बाघ जिले के जंगलों में बसा हुआ है। इसके बाद से ऐसा माना जा रहा है कि बाघ को यहां का वातावरण व जंगल रास आ रहा है। यही कारण है कि वो यहां पर लंबे समय से रुका है।
रणथंभौर अभयारण्य के बाघ टी -91, बाघिन टी-38 और एक अन्य बाघिन को कोटा के मुकन्दरा अभ्यारण्य में लाने के लिए नवम्बर माह में चयनित किया गया था। इनको दिसम्बर माह शिफ्ट करने था। सबसे बाघ टी 91 को ही शिफ्ट करना था। लेकिन उससे पहले ही 10 नवम्बर को इसने रणथंभौर अभयारण्य को छोड़ के बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में आ गया था। लेकिन तब से ही ये यहीं पर रह रहा था। लेकिन गत 22-23 जनवरी को रामगढ़-विषधारी अभयारण्य को छोड़ कर कलन्दा के जंगल मे प्रवेश कर गया था।
रणथंभौर अभयारण्य के बाघ टी -91, बाघिन टी-38 और एक अन्य बाघिन को कोटा के मुकन्दरा अभ्यारण्य में लाने के लिए नवम्बर माह में चयनित किया गया था। इनको दिसम्बर माह शिफ्ट करने था। सबसे बाघ टी 91 को ही शिफ्ट करना था। लेकिन उससे पहले ही 10 नवम्बर को इसने रणथंभौर अभयारण्य को छोड़ के बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में आ गया था। लेकिन तब से ही ये यहीं पर रह रहा था। लेकिन गत 22-23 जनवरी को रामगढ़-विषधारी अभयारण्य को छोड़ कर कलन्दा के जंगल मे प्रवेश कर गया था।