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गुर्जरों को अलग से 5 फीसदी आरक्षण, अगले महीने पेश होगा विधेयक
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 19 Sep 2017 03:43 PM IST
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राजस्थान विधानसभा
- फोटो : File
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विधानसभा का विशेष सत्र 11 अक्टूबर से शुरू हो सकता है, जिसमें गुर्जर सहित पांच जातियों को ओबीसी में अलग से पांच फीसदी आरक्षण देने का विधेयक रखा जा सकता है।
गुर्जर आंदोलन के मद्देनजर राज्य सरकार की ओर से गुर्जर नेताओं को इस संबंध में आश्वासन दिया गया है। इसके अनुसार, विधानसभा के सत्र में ओबीसी का कोटा 21 से बढ़ाकर 26 फीसदी करने और गुर्जर समेत पांच जातियों को ओबीसी में अलग से पांच फीसदी आरक्षण का विधेयक रखा जा सकता है।
यह विशेष सत्र छह महीने में एक बार विधानसभा सत्र बुलाने की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए बुलाया जा रहा है। दरअसल 26 अक्टूबर का छह महीने समय सीमा समाप्त हो रही है। यह सत्र तीन से पांच दिन का हो सकता है।
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गुर्जर आंदोलन के मद्देनजर राज्य सरकार की ओर से गुर्जर नेताओं को इस संबंध में आश्वासन दिया गया है। इसके अनुसार, विधानसभा के सत्र में ओबीसी का कोटा 21 से बढ़ाकर 26 फीसदी करने और गुर्जर समेत पांच जातियों को ओबीसी में अलग से पांच फीसदी आरक्षण का विधेयक रखा जा सकता है।
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यह विशेष सत्र छह महीने में एक बार विधानसभा सत्र बुलाने की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए बुलाया जा रहा है। दरअसल 26 अक्टूबर का छह महीने समय सीमा समाप्त हो रही है। यह सत्र तीन से पांच दिन का हो सकता है।
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तो इस वजह से दिया जाएगा अलग से आरक्षण
किरोड़ी सिंह बैंसला
राजस्थान में गुर्जर आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन भाजपा सरकार ने आरक्षण की अलग से विशेष पिछड़ा वर्ग यानि एसबीसी बनाते हुए गुर्जर समेत पांच जातियों को पांच फीसदी आरक्षण देने की अधिसूचना जारी की थी।
बाद मेें इसको लेकर अदालती विवाद हो गया। इसके अनुसार, आरक्षण तय सीमा को पार कर 54 फीसदी तक हो गया। ऐसे में राजस्थान में गुर्जर सहित पांच जातियों को 13 साल बाद पुन: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण कोटे में शामिल कर लिया गया है। ये जातियां ओबीसी में भी अस्थाई रूप से शामिल हो पाई हैं।
राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग ने 19 मई 2017 अधिसूचना जारी कर ओबीसी में बंजारा बालदिया एवं लबाना, गड़रिया, गाडरी तथा गायरी, गड़िया लोहार एवं गोडिलिया, गूजर एवं गुर्जर और राइका, रैबारी तथा देबासी को किया है।
बाद मेें इसको लेकर अदालती विवाद हो गया। इसके अनुसार, आरक्षण तय सीमा को पार कर 54 फीसदी तक हो गया। ऐसे में राजस्थान में गुर्जर सहित पांच जातियों को 13 साल बाद पुन: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण कोटे में शामिल कर लिया गया है। ये जातियां ओबीसी में भी अस्थाई रूप से शामिल हो पाई हैं।
राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग ने 19 मई 2017 अधिसूचना जारी कर ओबीसी में बंजारा बालदिया एवं लबाना, गड़रिया, गाडरी तथा गायरी, गड़िया लोहार एवं गोडिलिया, गूजर एवं गुर्जर और राइका, रैबारी तथा देबासी को किया है।