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दो किलोमीटर तक झोले में डालकर जच्चा-बच्चा को एंबुलेंस तक लाए

Sun, 13 Aug 2017 06:32 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sun, 13 Aug 2017 06:32 PM IST
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Pouring up to the ambulance by putting it in the bag
डेमो इमेज
जननी सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई। तीन मामलों ने प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने सवाल खड़े कर दिए। 
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पहला सनसनीखेज मामला प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के क्षेत्र उदयुपर से जुड़ा है। यहां के कोटड़ा तहसील स्थित बिलवल तालाब गांव में खराब सड़क के कारण एंबुलेंस 104 प्रसूता तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में उसने अपने घर में ही बच्चे का जन्म दे दिया। इसके बाद आनन-फानन में परिजन जच्चा-बच्चा को झोले में लकड़ी के बांस के सहारे लटकाकर करीब दो किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लेकर गए। जिसके बाद उसे एंबुलेंस के जरिये अस्पताल पहुंचाया गया।

उधर, इस गंभीर मामले पर कोई भी अधिकारी साफ-साफ कहने से बचता रहा। इनका कहना था कि हमने समय पर एंबुलेंस भिजवा दी थी, लेकिन खराब सड़क के कारण वह मौके तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, प्रदेश की सड़कों के खराब हालात के कारण सवाल उठता है कि आजादी के सत्तर साल बाद भी आज कई इलाके ऐसे हैं जहां तक सरकार अच्छी सड़क तक उपलब्ध नहीं करवा सकी।
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यहां सड़क पर ही हुआ प्रसव

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नवजात शिशु
दूसरा मामला, प्रदेश के झुंझुनूं जिले से जुड़ा है। यहां के बिसाउ स्थित अस्पताल से प्रसूता को धक्का देकर एक डॉक्टर ने बाहर निकाल दिया। ऐसे विकट हालात में लेबर पेन से कराह रही प्रसूता ने अस्पताल के बाहर सड़क पर ही बच्चे का जन्म दिया। मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना के बाद गुस्साए लोगों ने यहां अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की।
 
तीसरी घटना, धौलपुर जिले के सरमथुरा उपखंड के बरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। यहां प्रसूताओं को पर्याप्त बेड नहीं मिलने से उनकी डिलिवरी जमीन पर ही लिटाकर की जा रही है। ऐसे में यहां प्रसूता और उसके नवजात पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां केवल 6 बेड ही प्रसूताओं के लिए उपलब्ध है जबकि पिछले दो दिन में यहां 13 महिलाओं का प्रसव कराया गया।
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