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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Politics The month of March is no less than a litmus test for BJP leaders in Rajasthan

Politics: मार्च महीना राजस्थान में बीजेपी नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं! समझिए सियासी मायने

Wed, 01 Mar 2023 02:14 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 01 Mar 2023 02:14 PM IST
सार

राजस्थान में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन प्रदेश में बीजेपी नेताओं के बीच अंतर्कलह कम होने का नाम नहीं ले रही। ऐसा माना जा रहा है कि इस महीने में बीजेपी नेताओं की बीच वर्चस्व की लड़ाई और बढ़ सकती है।

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Politics The month of March is no less than a litmus test for BJP leaders in Rajasthan
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान में चुनावी बिगुल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भीलवाड़ा और दौसा की रैली के साथ ही बज चुका है। ऐसे में अब नेताओ में भी खासी होड़ नजर आ रही है, अपना वर्चस्व और अपनी ताकत आलाकमान को दिखाने की। यूं तो बीजेपी की प्रदेश स्तरीय स्थिति से सब ही वाकिफ हैं कि यहां पार्टी कितने गुटों में बटी हुई है। अब इस पर मुहर लगाने का समय आ चुका है।

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बता दें कि मार्च की शुरुआत में ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जन्मदिन जो कि आठ मार्च को आता है। लेकिन आठ मार्च को होली होने के कारण अब जन्मदिन को चार मार्च को ही मनाया जा रहा है। राजे का जन्मदिन प्रदेश की सिद्ध पीठ सालासर में मनाया जाना तय हुआ है। राजे के जन्मदिन पर पूरे प्रदेश के नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को निमंत्रण भेजे गए हैं। ऐसे में अनुमान है कि इस आयोजन में लाखों लोगों के आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री राजे की टीम इसको लेकर पिछले एक महीने से काम कर रही है।
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कई समर्थक नेताओं को भीड़ और कार्यकर्ताओं को लाने के जिम्मेदारी भी दी गई है। यूं तो सभी इसको राजे के जन्मदिन ही बता रहे हैं, परंतु राजनीति में कोई भी आयोजन राजनीति से जुदा नहीं होता है। जानकर इसको मैडम का शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं, जिसको लेकर बीजेपी की प्रदेश इकाई में चिंता भी देखी गई है।

प्रदेश में एक तरफ वसुंधरा राजे का जन्मदिन का उत्सव है, ठीक उसी दिन बीजेपी प्रदेश इकाई ने भी जयपुर में सरकार के खिलाफ विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया गया है। परंतु इस बार इस कार्यक्रम को युवा मोर्चा के कंधों पर डाल दिया गया है। अगर विधानसभा घेराव में कार्यकर्ताओं की भीड़ कम नजर आती है तो जिम्मेदारी युवा मोर्चा पर डाल दी जाएगी और कामयाबी मिली तो वो बीजेपी प्रदेश इकाई की होगी।


इस परिस्थिति में अब नेताओं के गुट खुलकर आमने-सामने आने की संभावना बढ़ गई है, कौन कहां जाएगा, इससे तय होगा कि कौन किसकी तरफ है। प्रदेश में चार मार्च को वसुंधरा राजे के खिलाफ या साथ की लड़ाई खुलकर सामने आने वाली है। बीजेपी प्रदेश इकाई की तरफ से भी नेताओं को खुलकर आमंत्रण दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने विधायक दल की बैठक में भी विधायकों से अपने क्षेत्र से लोगों को लाने की अपील की है। अल्पसंख्यक मोर्चा को भी जिम्मेदारी दी गई है को वो भी ज्यादा संख्या में भीड़ जुटाने का काम करें।

वहीं, बीजेपी विधायक अमृतलाल मीणा ने कहा कि अभी वसुंधरा राजे से मुलाकात हुई है। दिन में एक बजे फिर मुलाकात होगी। चार मार्च को सालासर कार्यक्रम में शामिल रहूंगा। पार्टी के कार्यक्रम में भी मौजूद रहूंगा। सरकार ने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं किया, केवल बजट में घोषणा की। बीजेपी विधायक एवं प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा, राजे का कार्यक्रम पहले से फिक्स था। लेकिन पेपर लीक की घटना को देखते हुए युवा मोर्चा सड़कों पर उतर रहा है।

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