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विधायकों का इस्तीफा मामला:विधानसभा-सरकारी उपमुख्य सचेतक के विरोधाभासी जवाब,महेंद्र चौधरी बोले-कोई दबाव नहीं था
Tue, 31 Jan 2023 01:54 PM IST
नीरज शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: नीरज शर्मा
Updated Tue, 31 Jan 2023 01:54 PM IST
सार
हाईकोर्ट में राजस्थान विधानसभा सचिव और अध्यक्ष की ओर से विधायकों के इस्तीफा केस में जो शपथ पत्र पेश कर विधायकों का इस्तीफा स्वैच्छा से नहीं होने की बात कही, उसके उलट सरकारी मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने मीडिया से साफ कहा- हमारे ऊपर कोई दबाव नहीं था।
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विधायकों के इस्तीफा केस में विधानसभा और सरकारी उप मुख्य सचेतक के विरोधाभासी जवाब।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
राजस्थान विधानसभा के बाहर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रदेश कांग्रेस सरकार के उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने साफ कहा- कि हमारे ऊपर काहे का दबाव होता है। विधायक कभी भी इस्तीफा दे सकता है, कभी भी वापस ले सकता है। कोई दबाव नहीं होता है। जब उनकी (विधायकों की) इच्छा है उन्हें अधिकार है। वो चाहे तो इस्तीफा दे सकते हैं और वापस भी ले सकते हैं।
हमारे ऊपर काहे का दबाव, हमें जनता चुनकर भेजती है
जब महेंद्र चौधरी से मीडिया ने पूछा कि क्या आपने अपना इस्तीफा दबाव में दिया है या स्वेच्छा से दिया है ? तो महेंद्र चौधरी बोले- हमारे ऊपर काहे का दबाव है। हमें जनता चुनकर भेजती है। ढाई लाख मतदाता हमें चुनकर भेजते हैं, हम अपने दिमाग से काम करते हैं। जब मीडिया ने सवाल पूछा कि कोर्ट में दिए गए विधानसभा के जवाब में कहा गया है कि इस्तीफे स्वेच्छा से नहीं दिए हैं। इस पर महेंद्र चौधरी बोले- कोर्ट का मामला अलग है। कोर्ट के मामले में हम कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। कोर्ट में कोई मामला चल रहा है, तो कोर्ट में पेंडिंग मामले में हम बात नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि यह विधानसभा स्पीकर और कोर्ट के बीच चल रहा है।
क्या है पूरा मामला ?
सोमवार को राजस्थान विधानसभा सचिव का हाईकोर्ट में चौंकाने वाला जवाब पेश हुआ। जिसमें कहा गया कि विधायकों स्वेच्छा से इस्तीफे नहीं दिए थे। इस दौरान जवाब में 81 विधायकों के नाम भी सामने आए। 25 सितंबर 2022 को सियासी संकट के बीच कांग्रेस विधायक दल की पैरेलल मीटिंग बुलाने के बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के निवास पहुंचकर इस्तीफा देने वाले सीएम अशोक गहलोत समर्थक विधायकों के मामले में जब यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ, तो सभी आश्चर्य चकित रह गए। क्योंकि इस्तीफा देने के बाद विधायकों ने मीडिया को दिए बयान में कहीं नहीं कहा था कि हमने दबाव में इस्तीफे दिए गए हैं। बल्कि उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का षड़यंत्र था, इसलिए हम चाहते हैं कि सियासी संकट के दौरान जिन 102 विधायकों ने सरकार बचाई, उन्हीं में से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। यह भी कहा गया कि अशोक गहलोत के समर्थन में विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंपे हैं। कांग्रेस हाईकमान-ऑब्जर्वर्स की ओर से कोई गलत स्टैप उठाए जाने पर तब सरकार गिरने और मध्यावधि चुनाव होने की भी आशंका जब जता दी गई थी।
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81 विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे, इसलिए मंजूर नहीं किया
राजस्थान विधानसभा सचिव की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि 81 विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे, इसलिए इन्हें मंजूर नहीं किया गया। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्थल की बेंच में सुनवाई हुई, तो विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा के शपथ पत्र में यह बात उजागर हुई। जवाब में कहा कि विधानसभा सदस्यों की प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 173(3) के अनुसार इस्तीफे तब तक स्वीकार नहीं किए जा सकते, जब तक उनका स्वैच्छिक और वास्तविक होने का अध्यक्षीय समाधान नहीं हो जाता।
6 विधायकों ने पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए, 5 विधायकों के इस्तीफे की फोटोकॉपी थी
इस्तीफों पर लंबे समय तक फैसले नहीं करने पर भी जवाब में विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी की ओर से तर्क दिया कि हर विधायक ने अलग-अलग इस्तीफे नहीं दिए थे। सामूहिक रूप से इस्तीफे पेश किए गए थे। इसमें 6 विधायकों ने खुद पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए थे। 5 विधायकों के इस्तीफे की फोटोकॉपी थी। इसके कारण पूरी संतुष्टि और जांच-पड़ताल के बाद ही फैसला करना जरूरी था। विधानसभा सचिव की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की। महाधिवक्ता एमएस सिंघवी भी पेश हुए। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
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हमारे ऊपर काहे का दबाव, हमें जनता चुनकर भेजती है
जब महेंद्र चौधरी से मीडिया ने पूछा कि क्या आपने अपना इस्तीफा दबाव में दिया है या स्वेच्छा से दिया है ? तो महेंद्र चौधरी बोले- हमारे ऊपर काहे का दबाव है। हमें जनता चुनकर भेजती है। ढाई लाख मतदाता हमें चुनकर भेजते हैं, हम अपने दिमाग से काम करते हैं। जब मीडिया ने सवाल पूछा कि कोर्ट में दिए गए विधानसभा के जवाब में कहा गया है कि इस्तीफे स्वेच्छा से नहीं दिए हैं। इस पर महेंद्र चौधरी बोले- कोर्ट का मामला अलग है। कोर्ट के मामले में हम कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। कोर्ट में कोई मामला चल रहा है, तो कोर्ट में पेंडिंग मामले में हम बात नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि यह विधानसभा स्पीकर और कोर्ट के बीच चल रहा है।
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क्या है पूरा मामला ?
सोमवार को राजस्थान विधानसभा सचिव का हाईकोर्ट में चौंकाने वाला जवाब पेश हुआ। जिसमें कहा गया कि विधायकों स्वेच्छा से इस्तीफे नहीं दिए थे। इस दौरान जवाब में 81 विधायकों के नाम भी सामने आए। 25 सितंबर 2022 को सियासी संकट के बीच कांग्रेस विधायक दल की पैरेलल मीटिंग बुलाने के बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के निवास पहुंचकर इस्तीफा देने वाले सीएम अशोक गहलोत समर्थक विधायकों के मामले में जब यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ, तो सभी आश्चर्य चकित रह गए। क्योंकि इस्तीफा देने के बाद विधायकों ने मीडिया को दिए बयान में कहीं नहीं कहा था कि हमने दबाव में इस्तीफे दिए गए हैं। बल्कि उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का षड़यंत्र था, इसलिए हम चाहते हैं कि सियासी संकट के दौरान जिन 102 विधायकों ने सरकार बचाई, उन्हीं में से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। यह भी कहा गया कि अशोक गहलोत के समर्थन में विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंपे हैं। कांग्रेस हाईकमान-ऑब्जर्वर्स की ओर से कोई गलत स्टैप उठाए जाने पर तब सरकार गिरने और मध्यावधि चुनाव होने की भी आशंका जब जता दी गई थी।
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81 विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे, इसलिए मंजूर नहीं किया
राजस्थान विधानसभा सचिव की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि 81 विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक नहीं थे, इसलिए इन्हें मंजूर नहीं किया गया। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्थल की बेंच में सुनवाई हुई, तो विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा के शपथ पत्र में यह बात उजागर हुई। जवाब में कहा कि विधानसभा सदस्यों की प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 173(3) के अनुसार इस्तीफे तब तक स्वीकार नहीं किए जा सकते, जब तक उनका स्वैच्छिक और वास्तविक होने का अध्यक्षीय समाधान नहीं हो जाता।
6 विधायकों ने पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए, 5 विधायकों के इस्तीफे की फोटोकॉपी थी
इस्तीफों पर लंबे समय तक फैसले नहीं करने पर भी जवाब में विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी की ओर से तर्क दिया कि हर विधायक ने अलग-अलग इस्तीफे नहीं दिए थे। सामूहिक रूप से इस्तीफे पेश किए गए थे। इसमें 6 विधायकों ने खुद पेश होकर 81 विधायकों के इस्तीफे दिए थे। 5 विधायकों के इस्तीफे की फोटोकॉपी थी। इसके कारण पूरी संतुष्टि और जांच-पड़ताल के बाद ही फैसला करना जरूरी था। विधानसभा सचिव की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की। महाधिवक्ता एमएस सिंघवी भी पेश हुए। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।