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16 मोरों का शिकार, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

Wed, 24 May 2017 03:13 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 24 May 2017 03:13 PM IST
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poaching of peacocks in rajasthan
- फोटो : File Photo
राजस्थान में वन विभाग राष्ट्रीय पक्षी मोरों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रहा है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की अनदेखी के कारण राजस्थान में मोरों के शिकार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला बूंदी जिले के घाटोन का है जहां 16 मोर मृत मिले हैं। 
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वन विभाग ने इनकों कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। इससे पहले बूंदी में मोरों की संदिग्ध मौत के कई मामले सामने आ चुके है। जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा, अलवर, उदयपुर में भी इस तरह के कई मामले पिछले तीन—चार महीने में सामने आ चुके हैं। 
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ज्यादातर मोरों की मौत की वजह जहरीला चुग्गा रहा है। शिकारी इन्हें जहरीला चुग्गा डालकर कर मार रहे है। शिकारियों के इस करतूत का ज्यादातर मामलों में तो वन विभाग या ग्रामीणों को पता भी नहीं चल पाता। 
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दरअसल मोरों का शिकार इनके मांस और पंखों के लिए किया जाता है। मोर का मांस यौन शक्तिवर्धक माना जाता है। इसलिए मोर के मांस की मांग काफी रहती है। कई होटलों में चोरी—छिपे ये ग्राहकों को मंहगी कीमत पर परोसा जाता है। इस मामले में वन विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि राजस्थान में पिछले पांच साल में एक भी होटल पर छापा मार कर जांच नहीं की गई। जबकि मुखबीरों से उन्हें होटलों में मोर का मांस बिकने की सूचनाएं लगातार मिल रही है। 

दूसरे मोर के शिकार की बड़ी वजह इनके पंख है। इनकी विदेशों में काफी मांग रहती है। यहां मोरों की हत्या कर उनका पंख निकालकर उन्हें विदेशों में भेजा जाता है। राजस्थान घूमने आने पर्यटक भी मोर पंखों से बने उत्पाद मुंहमांगी कीमत पर खरीदकर ले जाते है। 


ऐसे करते है शिकार 

राजस्थान में मोरों की हत्या के सामने आए ज्यादातर मामलों में जहर से उनकी मौत होने की बात सामने आई है। शिकार चुग्गे में खेती में काम आने वाला कीटनाशक मिलाकर जहरीला बना देते है। मोर इसे खाते ही मर जाते है। मृत मोरों के पोस्टमार्ट में भी इसका खुलासा कई बार हो चुका है।   
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