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पहले श्मशान से भागे, फिर पांच घंटे बाद हेलमेट पहनकर किया दाह संस्कार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 26 Aug 2017 05:54 PM IST
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श्मशान में रखा शव
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दाह संस्कार के लिए श्मशान पहुंचे थे कि अचानक ऐसी घटना घटी की कि सबको भागना पड़ा गया। इस दौरान किसी कि हिम्मत नहीं हुई कि वे साथ में लाई बॉडी का श्मशान में जाकर दाह संस्कार कराए।
दरअसल, ये घटना सीकर जिले की है। यहां रामपुरा-थोई स्थित मामलोदा की ढाणी में बुजुर्ग बोदुराम की मौत के बाद उसके परिवार वाले और अन्य लोग शव को लेकर श्मशान पहुंचे। यहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल ही रही थी कि इसी दौरान वहां एक पेड़ पर लगे मधुमक्खियों के छते से मधुमक्खियां उड़ने लगी। धीरे-धीरे इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि इन्होंने वहां मौजूद करीब 50 लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। ऐसे हालात में यहां से मृतक के बेटे और मौजूद लोगों को जान बचाकर भागना पड़ा।
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दरअसल, ये घटना सीकर जिले की है। यहां रामपुरा-थोई स्थित मामलोदा की ढाणी में बुजुर्ग बोदुराम की मौत के बाद उसके परिवार वाले और अन्य लोग शव को लेकर श्मशान पहुंचे। यहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल ही रही थी कि इसी दौरान वहां एक पेड़ पर लगे मधुमक्खियों के छते से मधुमक्खियां उड़ने लगी। धीरे-धीरे इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि इन्होंने वहां मौजूद करीब 50 लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। ऐसे हालात में यहां से मृतक के बेटे और मौजूद लोगों को जान बचाकर भागना पड़ा।
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इतनी देर तक रखा रहा शव
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मधुमक्खियों के हमले में करीब पचास से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के करीब पांच घंटे बाद जब मधुमक्खियों की हलचल कुछ कम हुई तब जाकर मृतक बोदुराम के बेटे कालूराम, सचिन और नरेश घायलावस्था में ही श्मशान पहुंचे। इस दौरान वहां उन्होंने सिर पर हेलमेट और शरीर पर कंबल ओढ़ रखा था ताकि फिर कोई हमला हो तो बचा जा सके। अंतिम संस्कार में अधिकतर लोग ऐसे ही हेलमेट लगाए हुए दिखे।