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400 करोड रुपए की जमीन के संबंध में यथा-स्थिति के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 13 Nov 2017 07:44 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जेएलएन मार्ग के पास स्थित करीब 23 हजार वर्गगज भूमि को लेकर यथा-स्थिति के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश गर्ग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिए। अपील में कहा गया कि प्रकरण में एकलपीठ के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। जेडीए ने बिना अदालती आदेश उपलब्ध कराए 24 घंटे में भूमि से कब्जा लेने के संबंध में नोटिस जारी कर दिए। ऐसे में जेडीए के इस आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने भूमि पर यथा-स्थिति के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार रामजीपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति ने वर्ष 1966 व 1970 में काश्तकारों से जमीन खरीद कर लाल बहादुर नगर स्कीम विकसित की। अस्पताल ने समिति से करीब 23 हजार वर्गगज के पट्टे खरीद दिए। इसके बाद गर्ग अस्पताल की ओर से भू रूपान्तरण व नियमन के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। जिसे जेडीए ने वर्ष 2000 में कुछ शर्तो के साथ नियमित करने को कहा। इसी बीच तहसीलदार ने समिति के खिलाफ काश्तकार अधिनियम की धरा 90बी 2 के तहत कार्रवाई आरंभ कर दी। कृषि भूमि के अकृषि उपयोग पर जमीन जेडीए के पास चल गई। वहीं 2002 में सरकार ने जेडीए को कहा कि दौ सौ फीट लंबी पट्टी समर्पित करने पर भूमि का नियमन कर दिया जाए। गर्ग हॉस्पिटल की ओर से इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसे गत दिनों एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। इस जमीन की कीमत करीब चार सौ करोड़ रुपए बताई जा रही है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश गर्ग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिए। अपील में कहा गया कि प्रकरण में एकलपीठ के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। जेडीए ने बिना अदालती आदेश उपलब्ध कराए 24 घंटे में भूमि से कब्जा लेने के संबंध में नोटिस जारी कर दिए। ऐसे में जेडीए के इस आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने भूमि पर यथा-स्थिति के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार रामजीपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति ने वर्ष 1966 व 1970 में काश्तकारों से जमीन खरीद कर लाल बहादुर नगर स्कीम विकसित की। अस्पताल ने समिति से करीब 23 हजार वर्गगज के पट्टे खरीद दिए। इसके बाद गर्ग अस्पताल की ओर से भू रूपान्तरण व नियमन के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। जिसे जेडीए ने वर्ष 2000 में कुछ शर्तो के साथ नियमित करने को कहा। इसी बीच तहसीलदार ने समिति के खिलाफ काश्तकार अधिनियम की धरा 90बी 2 के तहत कार्रवाई आरंभ कर दी। कृषि भूमि के अकृषि उपयोग पर जमीन जेडीए के पास चल गई। वहीं 2002 में सरकार ने जेडीए को कहा कि दौ सौ फीट लंबी पट्टी समर्पित करने पर भूमि का नियमन कर दिया जाए। गर्ग हॉस्पिटल की ओर से इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसे गत दिनों एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। इस जमीन की कीमत करीब चार सौ करोड़ रुपए बताई जा रही है।
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