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फोर्टिस अस्पताल को भूमि आवंटन प्रकरण में FIR दर्ज करने के आदेश
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 13 Jan 2018 08:11 PM IST
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जयपुर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट ने फोर्टिस अस्पताल को नियम विरूद्ध जाकर भूमि आवंटन करने के मामले में जवाहर सर्किल थाना पुलिस को डॉ. नरेश कुमार त्रेहन और व्यवसायी राजन नन्दा, रितु नन्दा, शिवेन्द्र मोहनसिंह, गिरीश बिहारी माथुर व मालवेन्द्र मोहन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश राजकुमार शर्मा की ओर से दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिए।
परिवाद में कहा गया कि राजस्थान इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट नियम, 1974 के तहत सार्वजनिक कार्य के लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के पंजीकृत संस्थाओं को रियायती दर पर भूमि आवंटित की जा सकती है। इसके अलावा व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि सिर्फ नीलामी के जरिए ही देने का प्रावधान है। डॉक्टर त्रेहन ने 1995 को सरकार से सस्ता इलाज मुहैया कराने के लिए रियायती दर पर भूमि मांगी। इस पर जेडीए ने 2730 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि देने का प्रस्ताव दिया।
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परिवाद में कहा गया कि राजस्थान इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट नियम, 1974 के तहत सार्वजनिक कार्य के लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के पंजीकृत संस्थाओं को रियायती दर पर भूमि आवंटित की जा सकती है। इसके अलावा व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि सिर्फ नीलामी के जरिए ही देने का प्रावधान है। डॉक्टर त्रेहन ने 1995 को सरकार से सस्ता इलाज मुहैया कराने के लिए रियायती दर पर भूमि मांगी। इस पर जेडीए ने 2730 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भूमि देने का प्रस्ताव दिया।
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परिवाद में ये भी कहा
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परिवाद में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन के बाद 24 नवंबर 2001 को एक रुपए में त्रेहन की एसकोर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर को 4.7 एकड भूमि आवंटित की गई। आवंटन में दस फीसदी गरीब मरीजों का इलाल फ्री करने की शर्त रखी गई।
वहीं बाद में आरोपियों ने षडयंत्र रचकर आवंटन चैरिटेबल संस्था के स्थान पर कंपनी के नाम कर दिया गया। इसके बाद आरक्षित दर के साठ फीसदी दर पर पूर्ण रूप से व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई। इसके अलावा नियमों के विपरीत जाकर बिना अनुमति कंपनी के शेयर भी अंतरित किए गए।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
वहीं बाद में आरोपियों ने षडयंत्र रचकर आवंटन चैरिटेबल संस्था के स्थान पर कंपनी के नाम कर दिया गया। इसके बाद आरक्षित दर के साठ फीसदी दर पर पूर्ण रूप से व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी गई। इसके अलावा नियमों के विपरीत जाकर बिना अनुमति कंपनी के शेयर भी अंतरित किए गए।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।