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राजीनामे से निपटाने के लिए 1.80 लाख मुकदमें चिन्हित
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 08 Jul 2017 03:41 PM IST
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न्यायाधिपति के.एस. झवेरी ने राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर पीठ में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया
- फोटो : Amar Ujala
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राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ न्यायाधिपति के.एस. झवेरी ने आज राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर पीठ में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव एस.के.जैन ने बताया कि शनिवार को जोधपुर उच्च न्यायालय एवं प्रदेशभर के अधीनस्थ न्यायालयों में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राजीनामा योग 1 लाख 80 हजार मुकदमें चिन्हित कर रखे गए है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय जयपुर पीठ के लिए लगभग 1 हजार 500 एवं राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में लगभग 2 हजार मुकदमें रखे गए है। उन्होंने संभावना जाताई की अधिकतर मुकदमों का राजीनामे के द्वारा निस्तारण हो जाएगा।
जैन ने बताया कि लोक अदालत में पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ, एन आई एक्ट के मामले, पारिवारिक मामले, औद्योगिक विवाद, स्थानान्तरण, पेंशन, चयनित वेतन श्रृंखला, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेशों के विरूद्ध दायर याचिका, मोटर वाहन दुर्घटना अधिकरण के अवार्ड के विरूद्ध अपीलें, जेडीए से संबंधित विवाद, पैरोल व प्रिलिटिगेशन आदि से संबंधित प्रकरणों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि राष्टीय लोक अदालत में लिये गये निर्णय अन्तिम होने के साथ इस मुकदमें की अपील देश के किसी भी न्यायालय में नहीं हो सकती और यह अन्तिम निर्णय होता है।
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राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव एस.के.जैन ने बताया कि शनिवार को जोधपुर उच्च न्यायालय एवं प्रदेशभर के अधीनस्थ न्यायालयों में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजन किया जा रहा है। जिसमें राजीनामा योग 1 लाख 80 हजार मुकदमें चिन्हित कर रखे गए है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय जयपुर पीठ के लिए लगभग 1 हजार 500 एवं राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में लगभग 2 हजार मुकदमें रखे गए है। उन्होंने संभावना जाताई की अधिकतर मुकदमों का राजीनामे के द्वारा निस्तारण हो जाएगा।
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जैन ने बताया कि लोक अदालत में पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ, एन आई एक्ट के मामले, पारिवारिक मामले, औद्योगिक विवाद, स्थानान्तरण, पेंशन, चयनित वेतन श्रृंखला, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेशों के विरूद्ध दायर याचिका, मोटर वाहन दुर्घटना अधिकरण के अवार्ड के विरूद्ध अपीलें, जेडीए से संबंधित विवाद, पैरोल व प्रिलिटिगेशन आदि से संबंधित प्रकरणों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि राष्टीय लोक अदालत में लिये गये निर्णय अन्तिम होने के साथ इस मुकदमें की अपील देश के किसी भी न्यायालय में नहीं हो सकती और यह अन्तिम निर्णय होता है।
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