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मजहबी नजाकत से तैयार होते हैं जयपुरी गुलाल गोटे
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 09 Mar 2017 12:51 PM IST
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जयपुर में तैयार होता गुलाल गोटा
- फोटो : अमर उजाला
थोड़ा गुलाल, थोड़ा लाख, थोड़ी सी कलाकारी और एक छोटी सी फूंक... कुछ इस नजाकत से तैयार किया जाता है गुलाल गोटा। इसे मजहबी नजाकत इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि हिन्दुओं के रंगों के इस त्यौहार के अवसर पर मुसलमान बड़े प्यार से गुलाल गोटे तैयार कर प्रेम का रंग भर देते हैं। यही कारण है कि यह जयपुर से लेकर विदेशों तक हर होली पर खासा पसंद किया जाता है।
गुलाबी नगर का गुलाल गोटा जिस पर भी फेंका जाता है वो रंग से सराबोर हो जाता है। गुलाल गोटा बनाने का काम यूं, तो जयपुर में कई सालों से चल रहा है, पर अब भी इसे बनाना बेहद बारीकि का काम है। गुलाल गोटा बनाने वाले कलाकारों की मानें तो गुलाल गोटा जितना आकर्षक लगता है, इसे बनाने में उतनी ही मेहनत और उतना ही ध्यान भी लगता है। इसे बनाने में छोटी छोटी बातें हैं, जो ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसमें लाख को गर्म करने से लेकर उसे ठंडा करने। उसकी चपटी बनाने, फिर उसमें फूंक मारने और गुलाल भरने का काम काफी संभालकर किया जाता है। छोटी सी भी चूक हुई और गुलाल गोटा खराब हो जाता है। गुलाल गोटा बनाना ध्यान लगाने जैसे धैर्य का काम है।
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गुलाबी नगर का गुलाल गोटा जिस पर भी फेंका जाता है वो रंग से सराबोर हो जाता है। गुलाल गोटा बनाने का काम यूं, तो जयपुर में कई सालों से चल रहा है, पर अब भी इसे बनाना बेहद बारीकि का काम है। गुलाल गोटा बनाने वाले कलाकारों की मानें तो गुलाल गोटा जितना आकर्षक लगता है, इसे बनाने में उतनी ही मेहनत और उतना ही ध्यान भी लगता है। इसे बनाने में छोटी छोटी बातें हैं, जो ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसमें लाख को गर्म करने से लेकर उसे ठंडा करने। उसकी चपटी बनाने, फिर उसमें फूंक मारने और गुलाल भरने का काम काफी संभालकर किया जाता है। छोटी सी भी चूक हुई और गुलाल गोटा खराब हो जाता है। गुलाल गोटा बनाना ध्यान लगाने जैसे धैर्य का काम है।
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फूंक सही नहीं तो खराब हो जाती है लाख
जयपुर में तैयार होता गुलाल गोटा
- फोटो : अमर उजाला
गुलाल गोटा बनाने वाले आवाज मोहम्मद कहते हैं कि गुलाल गोटा बनाने में सबसे अहम काम फूंक मारना होता है। फूंकनी से फूंक सही न लगे तो नरम लाख खराब हो जाती है। फिर उसमें गुलाल डालना भी खास होता है। गर्म लाख से गुलाल गोटा तैयार कर फिर उसे पानी में डालकर ठंडा किया जाता है। एक गुलाल गोटा बनाने में जीतनी मेहनत लगती है, उसके मुकाबले में उसकी कीमत न के बराबर है। छह गुलाल गोटे का पैकेट 90 रुपए का बिकता है, जबकी उसमें लगने वाली लाख, गुलाल और मेहनत काफी ज्यादा होती है।
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पूरे परिवार को महारत है हासिल
जयपुर में तैयार होता गुलाल गोटा
- फोटो : अमर उजाला
आवाज मोहम्मद कहते हैं कि हमारी नौ पीढ़ियों को इस काम में महारत हासिल है। इस गुलाल गोटे की खासियत इसका लाख और खालिस अरारोट की गुलाल होती है, जो किसी भी तरह का नुकसान नहीं करती। वे बताते हैं कि गुलाल गोटे में लाख की परत इतनी नाजुक होती है कि वह किसी पर फैंकने से ही टूट जाती है। इससे व्यक्ति के चोट भी नहीं लगती और उसमें भरे हुए गुलाल से वह रंग में सराबोर हो जाता है। चूंकि हमारा पुश्तैनी काम है नहीं तो इस काम को सीखने में ही सालों लग जाते हैं। यही वजह है कि रजवाडों से लेकर आम परिवार तक इसे पसंद किया जाता है।