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सुरंग में 700 करोड़ की संपत्ति: कोड वर्ड में करोड़ों का लेन-देन, डिकोड करने में जुटा आयकर विभाग

Wed, 27 Jan 2021 01:51 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रियंका तिवारी Updated Wed, 27 Jan 2021 01:51 PM IST
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Jaipur IT Raid details of crores of transactions found in code word from secret tunnel income tax department engaged in decoding
जयपुर में जांच में जुटी हैं आयकर विभाग की टीम - फोटो : सोशल मीडिया

आयकर विभाग टीम ने बीते शनिवार (23 जनवरी) को राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी छापेमारी की थी। दरअसल, विभाग ने जयपुर के सर्राफा कारोबारी और दो रियल स्टेट डिवेलपर के यहां छापा मारा था। इसमें विभाग को पौने दो हजार करोड़ रुपये की दो नंबर की कमाई का पता चला था। हालांकि, आयकर विभाग की जांच अब भी जारी है। विभाग अभी अघोषित आय की गणना में लगा हुआ है। सर्राफा कारोबारी के यहां जांच में मिले सुरंग से अब विभाग के हाथ कई बेनामी संपत्ति के सबूत लगे हैं। इसके अलावा आयकर विभाग को दस्तावेजों और एंटीक सामग्री के साथ कोड वर्ड में लेन-देन का बहुत सारा ब्यौरा भी मिला है।

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लेन-देन का ब्याेरा कोड वर्ड में मिला

लेन-देन का ब्यौरा कोड वर्ड में मिलने के बाद अब आयकर विभाग के अफसर इसे डिकोड करने में लगे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कोड वर्ड डिकोड होने पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति और बिना टैक्स चुकाए लेन-देन का पता चलेगा। फिलहाल सिल्वर आर्ट ग्रुप की अघोषित संपत्ति की गणना की जा रही है। बताया जा रहा है कि सिल्वर आर्ट ग्रुप अब चार जांच एजेंसियों के घेरे में है। अब स्टेट जीएसटी की चोरी की आशंका देखते हुए जल्द वाणिज्यिक कर विभाग भी जांच शुरू करने की तैयारी में है।

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आयकर विभाग के बाद जयपुर पुलिस करेगी जांच

जांच में आयकर विभाग को सिल्वर आर्ट ग्रुप के यहां बड़ी संख्या में एंटीक सामग्री को विदेशियों को बेचने के सबूत मिले थे। नियम के मुताबिक, 100 साल से ज्यादा पुरानी एंटीक सामग्री किसी विदेशी को नहीं बेची जा सकती। इसकी जांच के लिए आयकर विभाग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी भेजी थी। जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव का कहना है कि आयकर विभाग की जांच खत्म होने के बाद पुलिस जांच शुरू करेगी। बता दें कि आयकर विभाग को सिल्वर आर्ट ग्रुप के यहां से कुछ लॉकर्स भी मिले हैं, जिन्हें अभी खोला ही नहीं गया है। बताया जा रहा है कि इनमें बड़ी संख्या में ज्वैलरी और निवेश के दस्तावेज हैं। इनके खुलने से कई और भी खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, अघोषित आय का आंकड़ा भी बढ़ सकता है।

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गुलाबी रंग की पोटलियों में बंद था राज

आयकर विभाग ने सिल्वर ग्रुप के अलावा गोकुल कृपा बिल्डर्स और चौरड़िया ग्रुप पर भी छापेमारी की थी। इसमें गोकुल कृपा बिल्डर्स के सिल्वर आर्ट से तार जुड़े होने की बात सामने आई। तीनों समूहों के यहां आयकर कार्रवाई में अघोषित आय का आंकड़ा 2000 करोड़ को पार कर सकता है। विभाग को गोकुल कृपा बिल्डर्स के मानसरोवर में बने ऑफिस के बेसमेंट से गुलाबी रंग की पोटलियों में बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज, प्रॉपर्टी की कैश में खरीद की रसीदें, कुछ डायरियों में बड़े पैमाने पर कैश के लेन-देन का हिसाब मिला था। बिल्डर समूह द्वारा रेरा में 765 करोड़ के प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड करा रखे हैं। इन एक भी प्रोजेक्ट का ग्रुप ने आयकर नहीं चुकाया। जब्त दस्तावेजों में गोकुल कृपा बिल्डर्स के 2018-19 में 100 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी बिना आयकर दिए खरीदने का भी खुलासा हुआ है।

फर्जी तरीके से किया गया निवेश

चौरड़िया ग्रुप पर छापेमारी के दौरान विभाग को जयपुर में 250 करोड़ रुपये की जमीन के दस्तावेज, अजमेर रोड पर जमीनों के निवेश के अलावा 430 करोड़ रुपये के कारोबार का पता चला। कई कंपनियों में फर्जी तरीके से निवेश करने के दस्तावेज भी मिले थे। इसके साथ ही इस ग्रुप द्वारा 133 करोड़ रुपये की कंपनी को फर्जी तरीके से खरीदने के दस्तावेज भी आयकर विभाग के हाथ लगे थे।

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