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चाइल्ड सेक्सुअल क्राइम की सुनवाई के लिए नहीं हैं पोक्सो कोर्ट, हाईकोर्ट ने माना गंभीर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 18 Sep 2017 08:46 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक अपराधों की सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष पोक्सो अदालतों का गठन नहीं होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि पोक्सो अधिनियम की धारा 28 में प्रावधान है कि हर जिले में इसके लिए अलग से विशेष अदालत खोली जाए। विधि विभाग ने हर जिले में विशेष अदालत खोलने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन केवल जयपुर जिले में ही विशेष अदालत गठित की गई है।
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इसके अलावा शेष अन्य जिलों में एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालतों को ही इसका कार्यभार सौंपा गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक मामलों की सुनवाई अलग तरह से होती है। विशेष अदालत का गठन नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार हर जिले में अलग से पोक्सो अदालत का गठन किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
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याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि पोक्सो अधिनियम की धारा 28 में प्रावधान है कि हर जिले में इसके लिए अलग से विशेष अदालत खोली जाए। विधि विभाग ने हर जिले में विशेष अदालत खोलने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था, लेकिन केवल जयपुर जिले में ही विशेष अदालत गठित की गई है।
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इसके अलावा शेष अन्य जिलों में एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालतों को ही इसका कार्यभार सौंपा गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ होने वाले लैंगिक मामलों की सुनवाई अलग तरह से होती है। विशेष अदालत का गठन नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार हर जिले में अलग से पोक्सो अदालत का गठन किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।