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365 दिन खुलता है ये सरकारी स्कूल, टीचर्स हैं यहां के REAL HERO
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 15 Dec 2017 04:46 PM IST
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शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
- फोटो : amar ujala
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सरकारी स्कूलों के नाम से आपके मन में जो छवि बनती है, उससे बिलकुल उलट एक सरकारी स्कूल एक शानदार मिसाल कायम कर रहा है। राजस्थान का ये सरकारी स्कूल छुट्टी के दिन भी बंद नहीं होता। पिछले दो साल से यहां हर रोज पढ़ाई होती है।
पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका ये सरकारी स्कूल राजस्थान के अलवर जिले में स्थित कोटकासिम के पास ही ऊजौली गांव में है। इसका नाम शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय है। स्कूल के शिक्षकों ने अपनी मेहनत के जरिये आज सरकारी स्कूल की परिभाषा को बदलकर रख दिया है।
हकीकत ये है कि स्कूल के शिक्षकों की मेहनत के चलते यहां मैरिट में स्टूडेंट अपना स्थान बना रहे हैं। इसका कारण है कि यहां पिछले दो साल से नियमित पढ़ाई होना। किसी भी तीज-त्यौंहार पर यहां शिक्षक अवकाश पर नहीं रहते, बल्कि एक्सट्रा क्लास लगाकर छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं।
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पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका ये सरकारी स्कूल राजस्थान के अलवर जिले में स्थित कोटकासिम के पास ही ऊजौली गांव में है। इसका नाम शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय है। स्कूल के शिक्षकों ने अपनी मेहनत के जरिये आज सरकारी स्कूल की परिभाषा को बदलकर रख दिया है।
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हकीकत ये है कि स्कूल के शिक्षकों की मेहनत के चलते यहां मैरिट में स्टूडेंट अपना स्थान बना रहे हैं। इसका कारण है कि यहां पिछले दो साल से नियमित पढ़ाई होना। किसी भी तीज-त्यौंहार पर यहां शिक्षक अवकाश पर नहीं रहते, बल्कि एक्सट्रा क्लास लगाकर छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं।
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ये हैं स्कूल की खासियतें, जानिए
विद्यालय में पढ़ाते शिक्षक जितेन्द्र
- फोटो : amar ujala
इसका परिणाम है कि यहां की छात्रा रितिका ने 10वीं बोर्ड एग्जाम की राज्य स्तरीय मेरिट में 96.5 प्रतिशत अंकों के साथ अपनी जगह बनाई। साथ ही, 2016-17 में 10वीं बोर्ड परीक्षा में आधे से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। वर्तमान में इस विद्यालय में 260 बच्चों का नामांकन है।
ऊजौली गांव में वर्ष 1932 में ये सरकारी विद्यालय शुरू हुआ और 1978 में इसे मिडिल तक किया गया। इसके बाद 2008-09 में ये विद्यालय माध्यमिक हो गया। अब इसे उच्च माध्यमिक विद्यलाय का दर्जा मिल गया है। इसके पीछे यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का अहम योगदान रहा। जिन्होंने अपनी छुट्टियों का उपयोग भी बच्चों को पढ़ाने में किया और अभी भी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गणित के शिक्षक निहाल सिंह राणा और अन्य शिक्षकों ने यहां छुट्टी के दिन भी पढ़ाने की पहल की। राणा ने 2013 में यह पहल की। शिक्षक जितेन्द्र यादव और अन्य ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
ऊजौली गांव में वर्ष 1932 में ये सरकारी विद्यालय शुरू हुआ और 1978 में इसे मिडिल तक किया गया। इसके बाद 2008-09 में ये विद्यालय माध्यमिक हो गया। अब इसे उच्च माध्यमिक विद्यलाय का दर्जा मिल गया है। इसके पीछे यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों का अहम योगदान रहा। जिन्होंने अपनी छुट्टियों का उपयोग भी बच्चों को पढ़ाने में किया और अभी भी कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गणित के शिक्षक निहाल सिंह राणा और अन्य शिक्षकों ने यहां छुट्टी के दिन भी पढ़ाने की पहल की। राणा ने 2013 में यह पहल की। शिक्षक जितेन्द्र यादव और अन्य ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
एक निजी स्कूल तो हो चुका है बंद
शहीद बलवंतसिंह राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय
- फोटो : amar ujala
जितेन्द्र यादव ने बताया कि वे अपनी हर सरकारी छुट्टी का उपयोग बच्चों को पढ़ाने में कर रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षक वीरसिंह, राजपाल यादव, विजय यादव, धर्मेन्द्र वशिष्ठ, देवेन्द्र यादव सहित अन्य लोग भी उनका इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बच्चे यहां पढ़ने के लिए लालायित रहते हैं। ऐसे में यहां संचालित एक निजी स्कूल तो बंद हो चुका है।
स्कूल के शिक्षकों की पढ़ाने की जिद को देखकर अब यहां कई निजी फर्म और संगठन भी आर्थिक रूप से सहयोग कर रहे हैं और स्कूल में कमरों का निर्माण कराया जा रहा है। ताकि यहां छात्र-छात्राओं को कोई परेशानी न हो।
छह कमरों में 10 कक्षाएं चलाने के बावजूद यहां के शिक्षकों ने अपनी मेहनत और बच्चों के सहयोग से 2015-16 में अच्छा परिणाम दिया। ये देख एक कंपनी ने यहां स्कूल में भवन निर्माण कराने के लिए एक करोड़ की मदद करने को हाथ बढ़ाया। अब यहां निर्माण कार्य जारी है।
ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की सफलता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बच्चे यहां पढ़ने के लिए लालायित रहते हैं। ऐसे में यहां संचालित एक निजी स्कूल तो बंद हो चुका है।
स्कूल के शिक्षकों की पढ़ाने की जिद को देखकर अब यहां कई निजी फर्म और संगठन भी आर्थिक रूप से सहयोग कर रहे हैं और स्कूल में कमरों का निर्माण कराया जा रहा है। ताकि यहां छात्र-छात्राओं को कोई परेशानी न हो।
छह कमरों में 10 कक्षाएं चलाने के बावजूद यहां के शिक्षकों ने अपनी मेहनत और बच्चों के सहयोग से 2015-16 में अच्छा परिणाम दिया। ये देख एक कंपनी ने यहां स्कूल में भवन निर्माण कराने के लिए एक करोड़ की मदद करने को हाथ बढ़ाया। अब यहां निर्माण कार्य जारी है।