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पहली बार चौराहे पर आए भगवान महावीर! सपना हुआ पूरा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 28 Sep 2017 05:29 PM IST
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सीकर में स्थापित हुई मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
एक जैन मुनि ने 22 साल पहले भगवान महावीर को चौराहे पर लाने की सपना देखा...विरोध भी झेला और अब जाकर उनका यह सपना पूरा हुआ है। मुनि का मानना है कि चौराहे पर भगवान महावीर का आना जरूरी है, जिससे हर वर्ग हर धर्म के लोग उनके अहिंसा और संयम के संदेश को जान सकें।
दरअसल राजस्थान के सीकर में पहली बार भगवान महावीर की मूर्ति चौराहे पर स्थापित की गई है। दावा है कि ऐसा पहली बार हुआ है। देश में पहली बार 41 इंच की भगवान महावीर की प्रतिमा सीकर के तापड़िया बगीची चौराहे पर लगाई गई है। इस मूर्ति का अनावरण 8 अक्टूबर को होगा।
जानकारी के मुताबिक अपने कड़वे प्रवचनों के लिए पहचाने जाने वाले जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने करीब 22 साल पहले महावीर भगवान को चौराहे पर स्थापित करने की बात कही थी। तब उनकी इस बात का समाज में विरोध भी हुआ था। लेकिन धीरे धीरे उनके तर्कों को समझा गया और माना भी गया। अब अपने प्रवास के दौरान सीकर में यह कार्यक्रम होने जा रहा है।
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दरअसल राजस्थान के सीकर में पहली बार भगवान महावीर की मूर्ति चौराहे पर स्थापित की गई है। दावा है कि ऐसा पहली बार हुआ है। देश में पहली बार 41 इंच की भगवान महावीर की प्रतिमा सीकर के तापड़िया बगीची चौराहे पर लगाई गई है। इस मूर्ति का अनावरण 8 अक्टूबर को होगा।
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जानकारी के मुताबिक अपने कड़वे प्रवचनों के लिए पहचाने जाने वाले जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने करीब 22 साल पहले महावीर भगवान को चौराहे पर स्थापित करने की बात कही थी। तब उनकी इस बात का समाज में विरोध भी हुआ था। लेकिन धीरे धीरे उनके तर्कों को समझा गया और माना भी गया। अब अपने प्रवास के दौरान सीकर में यह कार्यक्रम होने जा रहा है।
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इनके नाम पर होगा नामकरण
तरुण सागर
- फोटो : self
8 अक्टूबर को खास आयोजन के तहत मूर्ति का अनावरण होगा। इसमें 8 धर्मगुरु मूर्ति का अनावरण करेंगे। इनमें आचार्य लोकेश मुनी, इमाम उमर अहमद इलियासी, गोस्वामी सुशील महाराज, परमजीत सिंह चन्डीक, बोद्ध भिक्षु संघ सेना, फादर बंटी मौजूद होंगे।
मूर्ति बिजोलिया पत्थर से बनाई गई है। चूंकि इसका तरह का सपना तरुण सागर महाराज ने देखा था तो इस चौराहे या सर्किल का नामकरण भी उनके नाम पर ही किया गया है।
मूर्ति बिजोलिया पत्थर से बनाई गई है। चूंकि इसका तरह का सपना तरुण सागर महाराज ने देखा था तो इस चौराहे या सर्किल का नामकरण भी उनके नाम पर ही किया गया है।