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कालीसिंध परियोजना मामले में पूर्व मुख्यमंत्री को सीबीआई अदालत से मिली राहत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 03 Nov 2017 07:16 PM IST
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अशोक गहलोत
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सीबीआई मामलों की विशेष अदालत क्रम-3 ने झालावाड़ की कालीसिंध नदी पर बांध निर्माण में वित्तीय अनियमितता के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व ओम मेटल्स के तीन निदेशकों सहित अन्य को राहत देते हुए रिवीजन अर्जी खारिज कर दी है।
निचली अदालत ने 23 मार्च 2015 को परिवाद को खारिज कर दिया था। इस आदेश को परिवादी श्यामसिंह राठोड़ ने रिवीजन अर्जी दायर कर चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार परिवादी ने बांध निर्माण में वित्तीय अनियमितता को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व ओम मेटल के निदेशकों चन्द्रप्रकाश कोठारी, डीपी कोठारी और सुनील कोठारी सहित सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएल सौलंकी व एनएस सत्संगी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवाद में कहा गया कि ओम मेटल्स को लाभ पहुंचाने के लिए पुराने टेंडर निरस्त कर नए टेंडर जारी किए गए और शर्तों में बदलाव किया गया।
वहीं ठेका राशि भी करीब दो सौ करोड़ रुपए बढ़ाकर 457 करोड़ रुपए कर दी गई। जिसे निचली अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हाईकोर्ट इस प्रकरण में वर्ष 2011 में जनहित याचिका को खारिज कर चुका है। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय से भी एसएलपी खारिज हो चुकी है।
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निचली अदालत ने 23 मार्च 2015 को परिवाद को खारिज कर दिया था। इस आदेश को परिवादी श्यामसिंह राठोड़ ने रिवीजन अर्जी दायर कर चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार परिवादी ने बांध निर्माण में वित्तीय अनियमितता को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व ओम मेटल के निदेशकों चन्द्रप्रकाश कोठारी, डीपी कोठारी और सुनील कोठारी सहित सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएल सौलंकी व एनएस सत्संगी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवाद में कहा गया कि ओम मेटल्स को लाभ पहुंचाने के लिए पुराने टेंडर निरस्त कर नए टेंडर जारी किए गए और शर्तों में बदलाव किया गया।
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वहीं ठेका राशि भी करीब दो सौ करोड़ रुपए बढ़ाकर 457 करोड़ रुपए कर दी गई। जिसे निचली अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हाईकोर्ट इस प्रकरण में वर्ष 2011 में जनहित याचिका को खारिज कर चुका है। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय से भी एसएलपी खारिज हो चुकी है।
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