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सरकारी गेस्ट हाऊस में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सांसद का प्रवेश बंद
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 08 May 2017 08:38 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित राजस्थान हाऊस के बकाया किराए के मामले में सख्ती दिखाई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि जब तक पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्रसिंह और पूर्व सांसद महेश जोशी अपना बकाया जमा नहीं कराते, जब तक उन्हें राज्य सरकार के किसी भी गेस्ट हाऊस और डाक बंगला आदि में रुकने की अनुमति नहीं दी जाए। इसके साथ ही अदालत ने भंवर जितेन्द्रसिंह की ओर से पेश दो प्रार्थना पत्रों को खारिज करते हुए 10-10 हजार रुपए का हर्जाना भी लगा दिया है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर केबी अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान भंवर जितेन्द्रसिंह की ओर से दो प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से दिल्ली की निचली अदालत में रिकवरी स्टे का दावा किया गया है। ऐसे में इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाए। जिसे 10-10 हजार रुपए के हर्जाने के साथ खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि प्रार्थना पत्र रिकवरी टालने के लिए पेश किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार बकाया वसूली के लिए ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसे में दोनों पूर्व जनप्रतिनिधियों को सरकारी भवनों में रुकने की सुविधा से बैन किया जाए।
इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने बताया कि अब केवल भंवर जितेन्द्रसिंह व महेश जोशी से ही वसूली शेष है। भंवर जितेन्द्रसिंह से करीब 36 लाख रुपए और महेश जोशी के करीब नौ लाख रुपए की वसूली होनी है। इसके संबंध में जिला कलक्टर्स को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यदि जरूरत पडी तो दोनों की संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकारी आवासों में दोनों की एन्ट्री बेन करते हुए वसूली के आदेश दिए हैं।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर केबी अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान भंवर जितेन्द्रसिंह की ओर से दो प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से दिल्ली की निचली अदालत में रिकवरी स्टे का दावा किया गया है। ऐसे में इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाए। जिसे 10-10 हजार रुपए के हर्जाने के साथ खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि प्रार्थना पत्र रिकवरी टालने के लिए पेश किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार बकाया वसूली के लिए ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसे में दोनों पूर्व जनप्रतिनिधियों को सरकारी भवनों में रुकने की सुविधा से बैन किया जाए।
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इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने बताया कि अब केवल भंवर जितेन्द्रसिंह व महेश जोशी से ही वसूली शेष है। भंवर जितेन्द्रसिंह से करीब 36 लाख रुपए और महेश जोशी के करीब नौ लाख रुपए की वसूली होनी है। इसके संबंध में जिला कलक्टर्स को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यदि जरूरत पडी तो दोनों की संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकारी आवासों में दोनों की एन्ट्री बेन करते हुए वसूली के आदेश दिए हैं।
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