{"_id":"592935284f1c1bbf47535d21","slug":"doctor-s-negligence-in-ganganagar","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टर की लापरवाही से मासूम ने गंवाया हाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्टर की लापरवाही से मासूम ने गंवाया हाथ
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 27 May 2017 01:43 PM IST
विज्ञापन
बच्चे का हाथ कटा बताते परिजन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीगंगानगर शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से आठ माह के बच्चे का हाथ कटने का मामला सामने आया है। परिजनों ने डॉक्टर और नर्सिंगकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को कार्रवाई के लिए ज्ञापन दिया है।
पुलिस अधीक्षक को दिए ज्ञापन में चक 7 पीएसडी घड़साना निवासी सुरेन्द्र कुमार जाट ने आरोप लगाया है कि उसके आठ माह के पुत्र दिशांत को पेशाब की समस्या होने पर रायसिंहनगर में डॉक्टर को को दिखाया था, जहां से उसने श्रीगंगानगर इलाज कराने के लिए कहा।
किसी के कहने पर परिजनों ने बच्चे को यहां 30 मार्च को दुआ हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां 4 अप्रैल को बच्चे का आॅपरेशन डॉ. मनोज दुआ ने किया। इसके बाद बच्चा सही था, इस पर 6 अप्रैल को नर्सिंगकर्मी ने बच्चे को ड्रिप लगाई। इसके बाद बच्चे के हाथ में सूजन आ गई। धीरे—धीरे सूजन बढ़ने लगी तो परिजनों ने डॉक्टर को बुलाने को कहा, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
विज्ञापन
बीस घंटे बाद आए डॉक्टर ने बच्चे की जांच की और कहा कि गुड़गांव में जांच करवाकर आओ, बच्चा ठीक हो जाएगा। गुड़गांव के एक बड़े निजी अस्पताल में बच्चे को दिखाया तो उन्होंने हाथ खराब होने की बात कही तथा बच्चे का हाथ काट दिया। वहां डॉक्टरों ने कहा कि हाथ काटकर बच्चे की जान बचाई है। वापस आकर दुआ हॉस्पिटल में डॉक्टर से मिले तो उन्हें बाहर निकलवा दिया। ज्ञापन में पीड़ित पक्ष ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक को दिए ज्ञापन में चक 7 पीएसडी घड़साना निवासी सुरेन्द्र कुमार जाट ने आरोप लगाया है कि उसके आठ माह के पुत्र दिशांत को पेशाब की समस्या होने पर रायसिंहनगर में डॉक्टर को को दिखाया था, जहां से उसने श्रीगंगानगर इलाज कराने के लिए कहा।
विज्ञापन
किसी के कहने पर परिजनों ने बच्चे को यहां 30 मार्च को दुआ हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां 4 अप्रैल को बच्चे का आॅपरेशन डॉ. मनोज दुआ ने किया। इसके बाद बच्चा सही था, इस पर 6 अप्रैल को नर्सिंगकर्मी ने बच्चे को ड्रिप लगाई। इसके बाद बच्चे के हाथ में सूजन आ गई। धीरे—धीरे सूजन बढ़ने लगी तो परिजनों ने डॉक्टर को बुलाने को कहा, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
विज्ञापन
बीस घंटे बाद आए डॉक्टर ने बच्चे की जांच की और कहा कि गुड़गांव में जांच करवाकर आओ, बच्चा ठीक हो जाएगा। गुड़गांव के एक बड़े निजी अस्पताल में बच्चे को दिखाया तो उन्होंने हाथ खराब होने की बात कही तथा बच्चे का हाथ काट दिया। वहां डॉक्टरों ने कहा कि हाथ काटकर बच्चे की जान बचाई है। वापस आकर दुआ हॉस्पिटल में डॉक्टर से मिले तो उन्हें बाहर निकलवा दिया। ज्ञापन में पीड़ित पक्ष ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।