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नोटबंदी में डेयरी कर्मचारियों ने बदली 64 लाख रुपए की ब्लैकमनी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 01 Jun 2017 09:34 PM IST
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एसीबी ने केस दर्ज किया
- फोटो : Demo pic
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देश में नोटबंदी की घाेषणा के बाद जयपुर सरस डेयरी व सरस पार्लर के कर्मचारियों द्वारा करीब 64.19 लाख रुपए की ब्लैकमनी बदलने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच के बाद एसीबी ने नई करेंसी को बदलने और पद का दुरुपयोग करने व भ्रष्टाचार करने की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया।
यह केस एसीबी के इंस्पेक्टर ब्रजपाल की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया। जिसमें सरस डेयरी के कैशियर रामदेव जाट व सरस पार्लर प्रभारी सरलाल मील को आरोपी बनाया गया है। मामले की जांच एसीबी में इंस्पेक्टर रणजीत सिंह को सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक एसीबी की पड़ताल में सामने आया कि नरेन्द्र माेदी ने 8 नवंबर 2016 को 500 व 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इसके बाद नवंबर से जनवरी माह तक सरस डेयरी के पार्लर में आने वाली बिक्री की नई करेंसी को डेयरी के प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद के पास रख लिए और बदले में राजकोष में पुरानी करेंसी जमा करा दी।
प्रारंभिक जांच में एसीबी ने माना कि सरस पार्लर के प्रभारी सरलाल मील व कैशियर रामदेव जाट है। दोनों ने अन्य अफसर-कर्मचारियों से मिलीभगत करके तीन माह में सरस पार्लर पर आने वाली नई करेंसी जमा नहीं कराई और पुरानी करेंसी जमा करा दी। यानि नई करेंसी की एवज में 64.19 लाख रुपए की पुरानी करेंसी बदलकर ब्लैकमनी को व्हाइट कर दिया।
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दरअसल, नोटबंदी के बाद एसीबी को जनवरी 2017 में सरस डेयरी में ब्लैकमनी को बदलकर नई करेंसी देने की भनक लगी थी। विधानसभा में यह मुद्दा उठा था। जिसमें गृहमंत्री कटारिया ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। तब एसीबी ने एक परिवाद दर्ज कर डेयरी में छापा मारकर रिकॉर्ड जब्त किया था। जिसकी जांच इंस्पेक्टर ब्रजपाल ने की थी।
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यह केस एसीबी के इंस्पेक्टर ब्रजपाल की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया। जिसमें सरस डेयरी के कैशियर रामदेव जाट व सरस पार्लर प्रभारी सरलाल मील को आरोपी बनाया गया है। मामले की जांच एसीबी में इंस्पेक्टर रणजीत सिंह को सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक एसीबी की पड़ताल में सामने आया कि नरेन्द्र माेदी ने 8 नवंबर 2016 को 500 व 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इसके बाद नवंबर से जनवरी माह तक सरस डेयरी के पार्लर में आने वाली बिक्री की नई करेंसी को डेयरी के प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद के पास रख लिए और बदले में राजकोष में पुरानी करेंसी जमा करा दी।
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प्रारंभिक जांच में एसीबी ने माना कि सरस पार्लर के प्रभारी सरलाल मील व कैशियर रामदेव जाट है। दोनों ने अन्य अफसर-कर्मचारियों से मिलीभगत करके तीन माह में सरस पार्लर पर आने वाली नई करेंसी जमा नहीं कराई और पुरानी करेंसी जमा करा दी। यानि नई करेंसी की एवज में 64.19 लाख रुपए की पुरानी करेंसी बदलकर ब्लैकमनी को व्हाइट कर दिया।
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दरअसल, नोटबंदी के बाद एसीबी को जनवरी 2017 में सरस डेयरी में ब्लैकमनी को बदलकर नई करेंसी देने की भनक लगी थी। विधानसभा में यह मुद्दा उठा था। जिसमें गृहमंत्री कटारिया ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। तब एसीबी ने एक परिवाद दर्ज कर डेयरी में छापा मारकर रिकॉर्ड जब्त किया था। जिसकी जांच इंस्पेक्टर ब्रजपाल ने की थी।