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परिवार समेत आत्महत्या करने वाले कांस्टेबल का सुसाइड नोट, 6 साल से प्रताड़ित कर रहे थे पुलिसकर्मी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 21 Jan 2018 04:47 PM IST
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सुसाइड के बाद मौके पर पुलिस अधिकारी
- फोटो : Amar Ujala
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चोरी के एक मुकदमे में पिछले छह साल से प्रताड़ना झेल रहे एक कांस्टेबल ने आज पत्नी और बेटे-बेटी समेत सामूहिक खुदकुशी कर ली। मृतक कांस्टेबल ने सामूहिक खुदकुशी के लिए अपने ही विभाग के लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
जानकारी के अनुसार कांस्टेबल गेनाराम मेघवाल नागौर जिले के सुरपालिया थाना इलाके के बाघारासर गांव का रहने वाला था। वह नागौर जिले में डीडवाना एएसपी का ड्राइवर था। उसकी पोस्टिंग डीडवाना थाने में चल रही थी। गेनाराम, पत्नी संतोष, 22 वर्षीया बेटी सुमित्रा और 20 वर्षीय बेटे गणपत सिंह ने आज फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
इससे पहले रविवार सुबह करीब 4 बजकर 22 मिनट पर गेनाराम ने अपने परिचित को पांच पन्नों का सुसाइड नोट व्हाट्स एप पर भेजा। इससे परिचित की सूचना पर सुरपालिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसपी नागौर पारिस देशमुख और आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
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जानकारी के अनुसार कांस्टेबल गेनाराम मेघवाल नागौर जिले के सुरपालिया थाना इलाके के बाघारासर गांव का रहने वाला था। वह नागौर जिले में डीडवाना एएसपी का ड्राइवर था। उसकी पोस्टिंग डीडवाना थाने में चल रही थी। गेनाराम, पत्नी संतोष, 22 वर्षीया बेटी सुमित्रा और 20 वर्षीय बेटे गणपत सिंह ने आज फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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इससे पहले रविवार सुबह करीब 4 बजकर 22 मिनट पर गेनाराम ने अपने परिचित को पांच पन्नों का सुसाइड नोट व्हाट्स एप पर भेजा। इससे परिचित की सूचना पर सुरपालिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसपी नागौर पारिस देशमुख और आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
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पुलिसकर्मियों को ठहराया जिम्मेदार, लगाए ये आरोप
सुसाइड नोट
- फोटो : Amar Ujala
सुसाइड नोट में पुलिस कांस्टेबल गेनाराम ने अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए सामूहिक आत्महत्या के लिए नागौर जिले में तैनात पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल, मृतक के खिलाफ चोरी का एक मामले की जांच चल रही है।
पांच पन्नों के इस सुसाइड नोट में मृतक ने मामले में अनुसंधान कर रहे एक उपाधीक्षक और एक एएसआई पर रिश्वत में मोटी रकम मांगने का आरोप लगाया। साथ ही, उस पर मामले में चोरी का रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले एएसआई राधाकिशन की एप्रोच होने की धमकियां देकर राजीनामा करने का दबाव डालने का आरोप भी लगाया।
मुकदमे की जांच कर रहे नागौर के एएसआई भंवरु खां, हैडकांस्टेबल रतनाराम पर उनके घर पर तफ्तीश के बहाने घर आकर बच्चों को बेवजह प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। साथ ही, एएसआई भंवरु खां द्वारा मुकदमे में फंसाने की धमकियां देकर 5 लाख रुपए मांगने की बात कही। आरोप है कि वह मुकदमा दर्ज करवाने पुलिस थाने गया तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। उसने कोर्ट इस्तगासे से रिपोर्ट दर्ज करवाई। तब उसे धमकियां मिलने लगी। जुर्म प्रमाणित नहीं होने पर भी दुराचरण रिपोर्ट भेजी गई।
पांच पन्नों के इस सुसाइड नोट में मृतक ने मामले में अनुसंधान कर रहे एक उपाधीक्षक और एक एएसआई पर रिश्वत में मोटी रकम मांगने का आरोप लगाया। साथ ही, उस पर मामले में चोरी का रिपोर्ट दर्ज करवाने वाले एएसआई राधाकिशन की एप्रोच होने की धमकियां देकर राजीनामा करने का दबाव डालने का आरोप भी लगाया।
मुकदमे की जांच कर रहे नागौर के एएसआई भंवरु खां, हैडकांस्टेबल रतनाराम पर उनके घर पर तफ्तीश के बहाने घर आकर बच्चों को बेवजह प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। साथ ही, एएसआई भंवरु खां द्वारा मुकदमे में फंसाने की धमकियां देकर 5 लाख रुपए मांगने की बात कही। आरोप है कि वह मुकदमा दर्ज करवाने पुलिस थाने गया तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। उसने कोर्ट इस्तगासे से रिपोर्ट दर्ज करवाई। तब उसे धमकियां मिलने लगी। जुर्म प्रमाणित नहीं होने पर भी दुराचरण रिपोर्ट भेजी गई।
छह साल पुराना ये है मामला
police logo
गेनाराम ने सुसाइड नोट में बताया कि साल 2012 में वह पुलिस लाइन में आवासीय क्वार्टर में परिवार के साथ रहता था। उस वक्त एएसआई राधाकिशन माली उसका पड़ोसी था। दोनों परिवारों में अच्छे संबंध थे और राधाकिशन के परिवार में कोई काम होने पर गेनाराम और उसकी पत्नी हमेशा मदद करते थे।
मार्च 2012 में राधाकिशन परिवार के साथ घर से बाहर गए था। इस दौरान उसके क्वार्टर के ताले टूटे देखकर गेनाराम की पत्नी ने उन्हें सूचित किया। बाद में, राधाकिशन ने गेनाराम के परिवार पर ही चोरी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया। जिसमें एक जांच अधिकारी ने पहले एफआर लगा दी। बाद में, फिर से मामला रिओपन करवाया गया। कुछ दिनों पहले जांच अधिकारी ने गेनाराम के बेटे गणपत सिंह के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। इससे पूरा परिवार डिप्रेशन में आ गया।
मार्च 2012 में राधाकिशन परिवार के साथ घर से बाहर गए था। इस दौरान उसके क्वार्टर के ताले टूटे देखकर गेनाराम की पत्नी ने उन्हें सूचित किया। बाद में, राधाकिशन ने गेनाराम के परिवार पर ही चोरी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया। जिसमें एक जांच अधिकारी ने पहले एफआर लगा दी। बाद में, फिर से मामला रिओपन करवाया गया। कुछ दिनों पहले जांच अधिकारी ने गेनाराम के बेटे गणपत सिंह के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश कर दिया। इससे पूरा परिवार डिप्रेशन में आ गया।