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NDPS केस में झूठे सबूत देकर सजा दिलाने वाली एसओजी की टीम पर चलेगा मुकदमा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 12 Jun 2017 08:06 PM IST
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कोर्ट
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राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ तस्करी के झूठे मुकदमे में फंसाकर चार लोगों को सजा दिलाने वाले एसओजी के सीआई सायरसिंह, कैलाश चौधरी, एसआई फूलचंद, सुनील गुप्ता, हैडकांस्टेबल विनोद कुमार सहित कांस्टेबल शैलेन्द्र, रामस्वरूप, संतोष, नाथुलाल व डूडीराम के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
अदालत ने हाईकोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार न्यायिक को कहा है कि वे इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एनडीपीएस कोर्ट में परिवाद पेश करें। इसके साथ ही अदालत ने चारों याचिकाकर्ताओं को बरी कर दिया है। न्यायाधीश पंकज भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश तोफीक अली व तीन अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को झूठे मामले में फंसाने के लिए न केवल झूठे साक्ष्य बनाए बल्कि झूठी गवाही भी दी।
याचिका में कहा गया कि 16 जून 2011 को एसओजी टीम को कथित सूचना मिली कि आंदनपाल आ रहा है। इस पर टीम ने सुबह पौने नौ बजे एसओजी थाने से सात किलोमीटर दूर आगरा रोड पर बैरिकेडिंग कर दी। वहीं साढ़े ग्यारह बजे फारच्यूनर कार और मिनी ट्रक आ रहा था। जब टीम ने कार चालक को रुकने का इशारा किया तो चालक ने ट्रक को वापस जाने का इशारा किया। इस पर एसओजी टीम ने दोनों वाहनों को पकड़ लिया। तलाशी में ट्रक से 99 बोरी डोडा पोस्त और कार से एक बोरी डोडा पोस्त बरामद किया।
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अदालत ने हाईकोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार न्यायिक को कहा है कि वे इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एनडीपीएस कोर्ट में परिवाद पेश करें। इसके साथ ही अदालत ने चारों याचिकाकर्ताओं को बरी कर दिया है। न्यायाधीश पंकज भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश तोफीक अली व तीन अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को झूठे मामले में फंसाने के लिए न केवल झूठे साक्ष्य बनाए बल्कि झूठी गवाही भी दी।
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याचिका में कहा गया कि 16 जून 2011 को एसओजी टीम को कथित सूचना मिली कि आंदनपाल आ रहा है। इस पर टीम ने सुबह पौने नौ बजे एसओजी थाने से सात किलोमीटर दूर आगरा रोड पर बैरिकेडिंग कर दी। वहीं साढ़े ग्यारह बजे फारच्यूनर कार और मिनी ट्रक आ रहा था। जब टीम ने कार चालक को रुकने का इशारा किया तो चालक ने ट्रक को वापस जाने का इशारा किया। इस पर एसओजी टीम ने दोनों वाहनों को पकड़ लिया। तलाशी में ट्रक से 99 बोरी डोडा पोस्त और कार से एक बोरी डोडा पोस्त बरामद किया।
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इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई
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याचिका में कहा गया कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि बताई जा रही घटना के दिन सुबह आठ बजकर चालीस मिनट पर ट्रक पुलिस अभिरक्षा में बस्सी टोल नाके से निकला, जबकि कार टोल नाके से निकली ही नहीं।
वहीं ट्रायल कोर्ट के आदेश से एसओजी टीम की कॉल डिटेल व लोकेशन निकाली गई। जिसमें पता चला कि टीम में शामिल पुलिसकर्मियों की अलग-अलग जगह लोकेशन आई। यह भी सामने आया कि घटना के दिन पुलिस का संबंधित वाहन सौ किलोमीटर से अधिक चला।
ट्रायल पूरी होने के बाद अदालत ने चारों याचिकाकर्ताओं को दस साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को बरी करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
वहीं ट्रायल कोर्ट के आदेश से एसओजी टीम की कॉल डिटेल व लोकेशन निकाली गई। जिसमें पता चला कि टीम में शामिल पुलिसकर्मियों की अलग-अलग जगह लोकेशन आई। यह भी सामने आया कि घटना के दिन पुलिस का संबंधित वाहन सौ किलोमीटर से अधिक चला।
ट्रायल पूरी होने के बाद अदालत ने चारों याचिकाकर्ताओं को दस साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को बरी करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।