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8 माह में 9 देशों में उल्टी चली एसीबी, तब पकड़ा फर्जी पुलिस आॅफिसर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 09 Aug 2017 08:55 PM IST
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आरोपी साहिल राजपाल
- फोटो : File photo
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स्पूफिंग के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय कॉल कर चौथ वसूली करने के आरोप में फर्जी पुलिस आॅफिसर तक पहुंचने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एक अलग रणनीति अपनाई। गत फरवरी माह में मुकदमा दर्ज होने के बाद 8 माह में एसीबी ने 9 देशों में मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से संपर्क किया।
इसकी वजह यह कि शातिर आरोपी विदेशी टेलीकॉम लाइन के जरिए अपना असली नंबर छिपाकर एसीबी के बड़े पुलिस अधिकारी और कंट्रोल रुम के नंबरों से धमकी भरे फोन कर वसूली कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीजी आलोक वशिष्ठ ने इसकी कमान आईजी सचिन मित्तल और एएसपी शंकरदत्त शर्मा को सौंपी।
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक जनवरी माह में आरोपी साहिल गंगानगर ने पीएचईडी के इंजीनियर्स को फोन करना शुरु किया। इनमें एक इंजीनियर को करीब 50 कॉल किए। इनमें एएसपी शंकरदत्त शर्मा और एसीबी कंट्रोल रुम तथा थाने का फोन नंबर परिवादी के मोबाइल पर डिस्प्ले हो रहा था।
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फरवरी माह में मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस ने परिवादी के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाई तब उसमें एएसपी व एसीबी थाने का नंबर आ रहा था। लेकिन जब एएसपी और एसीबी थाने के नंबरों की डिटेल निकलवाई। तब आउट गोइंग कॉल होने का रिकार्ड नहीं मिला।
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इसकी वजह यह कि शातिर आरोपी विदेशी टेलीकॉम लाइन के जरिए अपना असली नंबर छिपाकर एसीबी के बड़े पुलिस अधिकारी और कंट्रोल रुम के नंबरों से धमकी भरे फोन कर वसूली कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीजी आलोक वशिष्ठ ने इसकी कमान आईजी सचिन मित्तल और एएसपी शंकरदत्त शर्मा को सौंपी।
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एसीबी अधिकारियों के मुताबिक जनवरी माह में आरोपी साहिल गंगानगर ने पीएचईडी के इंजीनियर्स को फोन करना शुरु किया। इनमें एक इंजीनियर को करीब 50 कॉल किए। इनमें एएसपी शंकरदत्त शर्मा और एसीबी कंट्रोल रुम तथा थाने का फोन नंबर परिवादी के मोबाइल पर डिस्प्ले हो रहा था।
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फरवरी माह में मुकदमा दर्ज होने पर पुलिस ने परिवादी के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाई तब उसमें एएसपी व एसीबी थाने का नंबर आ रहा था। लेकिन जब एएसपी और एसीबी थाने के नंबरों की डिटेल निकलवाई। तब आउट गोइंग कॉल होने का रिकार्ड नहीं मिला।
विधायक मोहनलाल गुप्ता के नाम से आवंटित है क्वार्टर
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- फोटो : Demo pic
इससे साफ था कि कोई फर्जी तरीके से कॉल कर रहा है। पड़ताल में स्पूफिंग के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय कॉल करने का पता चला। तब एसीबी अधिकारियों ने नीचे ग्राउंड लेवल से पड़ताल शुरु की। सबसे पहले परिवादी इंजीनियर के बीएसएनएल मोबाइल फोन नंबरों पर फोन कॉल्स के आईपी एड्र्रेस की जानकारी जुटाई।
तब एयरसेल मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी से लाइन होने का पता चला। संबंधित कंपनी ने जांच में हांगकांग की लोट्स टेलीकोम मोबाइल कंपनी से लाइन आना बताया। इसके बाद हांगकांग में कंपनी से संपर्क करने पर कनाडा की कंपनी से संपर्क हुआ।
उन्होंने ग्लोबल कम्यूनिकेशन कंपनी, यूएसए के बारे में बताया। यूएसए की कंपनी ने साउथ अफ्रीका में लाटाविया से एक कंपनी से फोन कॉल लाइन की बात कही। इसके बाद लाटाविया में संपर्क किया तो सिंगापुर, फिर सिंगापुर से यूएसए और फिर वहां संपर्क करने पर चाइना की एक मोबाइल कंपनी से एसीबी टीम ने सहयोग लिया।
वहां जानकारी जुटाने पर आईपी एड्रेस साहिल के मोबाइल नंबरों का मिला। इसके बाद पुलिस ने आज साहिल को जालूपुरा में गोपीनाथ मार्ग स्थित एमएलए क्वाटर्स से गिरफ्तार कर लिया। जिस क्वार्टर में साहिल ठहरा हुआ था। वह किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहनलाल गुप्ता के नाम से आवंटित है। आरोपी साहिल पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर का पौता है।
तब एयरसेल मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी से लाइन होने का पता चला। संबंधित कंपनी ने जांच में हांगकांग की लोट्स टेलीकोम मोबाइल कंपनी से लाइन आना बताया। इसके बाद हांगकांग में कंपनी से संपर्क करने पर कनाडा की कंपनी से संपर्क हुआ।
उन्होंने ग्लोबल कम्यूनिकेशन कंपनी, यूएसए के बारे में बताया। यूएसए की कंपनी ने साउथ अफ्रीका में लाटाविया से एक कंपनी से फोन कॉल लाइन की बात कही। इसके बाद लाटाविया में संपर्क किया तो सिंगापुर, फिर सिंगापुर से यूएसए और फिर वहां संपर्क करने पर चाइना की एक मोबाइल कंपनी से एसीबी टीम ने सहयोग लिया।
वहां जानकारी जुटाने पर आईपी एड्रेस साहिल के मोबाइल नंबरों का मिला। इसके बाद पुलिस ने आज साहिल को जालूपुरा में गोपीनाथ मार्ग स्थित एमएलए क्वाटर्स से गिरफ्तार कर लिया। जिस क्वार्टर में साहिल ठहरा हुआ था। वह किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहनलाल गुप्ता के नाम से आवंटित है। आरोपी साहिल पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर का पौता है।
जिसमें मोटी पेमेंट देकर एक कोड हासिल किया जाता है
इंटरनेट
- फोटो : फाइल फोटो
एसीबी के मुताबिक साहिल ने करोड़ों रुपए की ठगी की है। उसने इंटरनेट पर कुछ ऐसी वेबसाइट्स पर संपर्क किया। जिसमें मोटी पेमेंट देकर एक कोड हासिल किया जाता है। इसके बाद अपने नंबर को गुप्त रखकर किसी अन्य व्यक्ति का नंबर उस मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को दिया जाता है।
जो कि किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल पर डिस्प्ले होगा। कुछ इसी तरह की आईटी तकनीक का इस्तेमाल कर साहिल फर्जी एसीबी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी कर रहा था।
जो कि किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल पर डिस्प्ले होगा। कुछ इसी तरह की आईटी तकनीक का इस्तेमाल कर साहिल फर्जी एसीबी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी कर रहा था।